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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

नया साल कुछ नये सवाल पुराने साल रखे अपने पास पुराने सवाल

शायद कोई
चमत्कार होगा
और जरूर होगा
पहले कभी
नहीं हुआ तो
क्या होता है
इस बार होगा
पक्का होगा
असरदार होगा
हो सकता है
दो या तीन
बार होगा
हमेशा होते
रहने की आशा
या सोच नहीं
पक रही है कहीं
खाली दिमाग
के किसी
बिना ईधन
के चूल्हे में
दो या तीन
नहीं भी सही
एक ही बार सही
क्या पता
वो इस बार होगा
हर साल आता है
नया साल
पुराने साल
के जाते ही
इस बार भी
आ गया है
आज ही आया है
पुराना हिसाब
वहीं पीछे
छोड़ के आया है
या बैंक के खाते
के हिसाब की तरह
कुछ कुछ काम
का आगे को भी
सरकाया है
पहला पहला
दिन है साल का
अभी हाथ में
ही दिख रही है धूनी
जमाने का मौका
ही नहीं मिल पाया है
पिछले साल भी
आया था एक साल
इसी जोशो और
खरोश के साथ
जानते थे जानने वाले
चलेगा तो चलेगा
आँखिर कितना
बस एक ही तो साल
जमे जमाये
इस से पहले
क्यों नहीं कर
दिये जायें खड़े कुछ
अनसुलझे सवाल
उलझा इतना
कि साफ साफ
महसूस हुआ साल भर
कि सँभलते संभलते
भी नहीं संभल पाया है
नये साल की हो चुकी है
आज से शुरुआत
बस यही पता नहीं
कुछ चल पाया है
कि समझदार है बहुत
और सवाल अनसुलझे
पिछले साल के
अपने साथ में
ले कर आया है
या बेवकूफ है
‘उलूक’ तेरी
तरह का ही एक
खुद उलझने के
लिये सवालों से
नये सवालों
का न्योता
सवाल खड़े
करने वालों को
पिछले साल से ही
दे कर आया है ।

चित्र साभार: www.happynewyear2015clipart.in
   







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