http://blogsiteslist.com
कथावाचक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कथावाचक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 7 अप्रैल 2014

आदत से मजबूर कथावाचक खाली मैदान में कुछ बड़बड़ायेंगे

भेड़ियों के झुंड में
भेड़ हो चुके कुछ
भेड़ियों के
मिमयाने की
मजबूरी को

कोई व्यँग कह ले
या उड़ा ले मजाक

अट्टहासों के
बीच में तबले
की संगत जैसा
ही कुछ महसूस
फिर भी
जरूर करवायेंगे

सुने ना सुने कोई पर
रेहड़ में एक दूसरे को
धक्का देते हुऐ
आगे बढ़ते हुऐ
भेड़ियों को भी पता है
शेरों के शिकार में से
बचे खुचे माँस और
हड्डियों में हिस्से बांट
होते समय सभी
भेड़ों को उनके अपने
अंदर के डर अपने
साथ ले जायेंगे

पूँछे खड़ी कर
के साथ साथ
एक दूसरे के
बदन से बदन
रगड़ते हुऐ एक दूसरे
का हौसला बढ़ायेंगे
काफिले की
रखवाली करते
साथ चल रहे कुत्ते
अपनी वफादारी
अपनी जिम्मेदारी
हमेशा की तरह
ही निभायेंगे

बाहर की ठंडी हवा
को बाहर की
ओर ही दौड़ायेंगे
अंदर हो रही
मिलावटों में
कभी पहले भी
टाँग नहीं अढ़ाई
इस बार भी
क्यों अढ़ायेंगे

दरवाजे हड्डियों के
खजाने के खुलते ही
टूट पड़ेंगे भेड़िये
एक दूसरे पर
नोचने के लिये
एक दूसरे की ताकत
को तौलते हुऐ
शेर को लम्बी दौड़
के बाद की थकावट
को दूर करने की
सलाह देखर
आराम करने का
मशविरा जरूर
दे कर आयेंगे

भेड़ हो चुके भेड़िये
वापस अपने अपने
ठिकानो पर लौट कर
शाँति पाठ जैसा
कुछ करवाने
में जुट जायेंगे

पंचतंत्र नहीं है
प्रजातंत्र है
इस अंतर को
अभी समझने में
कई स्वतंत्रता संग्राम
होते हुऐ नजर आयेंगे ।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...