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गुरुवार, 27 अगस्त 2015

ठंड रखना सीखना अच्छा होता है वो जो भी कहता है भले के लिये ही कह रहा होता है

अब सभी कुछ
हमेशा खराब और
गंदा नहीं होता है
सोच कर देखना
चाहिये फूल कमल
को देख कर इतना
तो कम से कम
गंदे कीचड़ में भी
मुस्कुराता हुआ
हमेशा ही जो
खिला होता है
सपने बना कर
बताने वाले को
अच्छी तरह से
ये पता होता है
सपना कौन से
पाँव में कैसे
किस तरीके से
और कब कहाँ
पर खड़ा होता है
करोड़ों की बात
सुनकर होता है
किसी के नीचे से
कहीं कुछ खिसक
सा रहा होता है
सौ हजार लाख का
कोई सपना अब
बाजार में कहीं भी
किसी भी दुकान
में नहीं होता है
खाली जमीन
दिखती है बंजर
पड़ी हुई सामने से
बंजर खाली दिमाग
के बस में बंजर
सोच लेना ही बड़ा
सोच लेना होता है
हो क्लास स्कूल
बाजार गली मैंदान
शहर हस्पताल
या कुछ और भी
स्मार्ट आज कहाँ
और किस पर
फिट हो रहा है
पूछना ही किसी
से नहीं होता है
सपने के ऊपर
से सपना
सपने के
आगे से सपना
सपने के पीछे
से सपना
कितना सपना सपना
हो रहा होता है
सपना सोचने सोचने
तक सामने से रख
कर एक और सपना
सपनों के कलाकार
ने इतना क्या
कम सीखा होता है
और ऐसे में
कहीं बीच से
करोड़ों के निकल
लेने का  इधर से
कहीं उधर को
सपनो सपनो में
किसी को आभास भी
नहीं कुछ होता है
‘उलूक’ आँखें फोड़
कर अपनी
गजब के ऐसे
सपनों को
सपनों में ही कहीं
खोद रहा होता है ।

चित्र साभार: www.clipartbagus.com

गुरुवार, 11 जून 2015

कीचड़ करना जरूरी है कमल के लिये ये नहीं सोच रहा होता है

जब सोच ही
अंधी हो जाती है
सारी दुनियाँ
अपनी जैसी ही
नजर आती है
अफसोस भी
होता है
कोई कैसे किसी
के लिये कुछ
भी सोच देता है
किसी के काम
करने का कोई
ना कोई मकसद
जरूर होता है
उसकी नजर होती है
उसकी सोच होती है
बुरा कोई भी
नहीं होता है
जो कुछ भी होता है
अच्छे के लिये होता है
कुछ भी किसी
के लिये भी
किसी समय भी
कहने से पहले
कोई क्यों नहीं
थोड़ा सोच लेता है
एक उल्टा लटका
हुआ चमगादड़ भी
उल्टा ही नहीं होता है
वो भी सामने वाले
सीधे को उल्टा हो कर
ही देख रहा होता है
‘उलूक’ तेरे लिये
तेरे आस पास
हर कोई गंदगी
बिखेर रहा होता है
सब के चेहरे पे
मुस्कान होती है
देखने वाला भी
खुश हो रहा होता है
बस यहीं पर पता
चल रहा होता है
एक अंधी सोच वाला
अंधेरे को बेकार ही में
कोस रहा होता है
जबकि गंदगी और
कीचड़ बटोरने वाला
हर कोई आने वाले
समय में कमल
खिलाने की
सोच रहा होता है ।

चित्र साभार: www.cliparthut.com

शनिवार, 15 मार्च 2014

होली को होना होता है बस एक दिन का सनीमा होता है

मित्रों के
लिये कम
दुश्मनों से
गले मिलने
के लिये
कुछ ज्यादा
होनी होती है
होली कई 
कई सालों
के गिले शिकवे
दूर करने की
एक मीठी सी
गोली होती है
बस एक दिन
के लिये
“आप” होते हैं
एक “हाथ”
में “कमल”
एक हाथ
में “लालटेन”
भी होनी होती है
“हाथी” की सूँड
से रंगों की बरसात
हरे सफेद नारंगी
रंग के “तिरंगे”
को “लाल” रंग
से सलामी
लेनी होती है
सफेद टोपी
किसी की भी हो
रंग भरी हो
आड़ी तिरछी हो
सभी के सिर पर
होनी होती है
“साईकिल” के
सवारों की
मेजबानी “कार”
वालों को
लेनी होती है
कहीं “गैससिलेण्डर”
कहीं “पतंग”
कहीं कहीं
जेब काटने
की “कैंची”
एक होनी
होती है
एक दिन
ही होता है
बिना पिये
जिस दिन
हर किसी
को भाँग
चढ़ी होनी
होती है
नेता कौन
अभिनेता कौन
मतलब ही नहीं
होना होता है
जनता हूँ
जनता को
एसा कुछ भी
कहीं भी नहीं
कहना होता है
बस एक ही दिन
प्यार मनुहार और
गिले शिकवे दूर
करने के लिये
होना होता है
जिसके होने को
हर कोई “होली”
होना कहता है
ना हरा होना
होता है ना
लाल होना होता है
जो होना होता है
बस काला और
सफेद होना होता है
एक दिन के
कन्फ्यूजन से
करोड़ों को
हजारों दिन
आगे के लिये
रोना होता है
होली हो लेती
है हर बार
चढ़े हुए रंगों
को उतरना
ही होता है
बाकी के
पाँच साल
का हर दिन
“उलूक”
देश की
खाल खीँचना
और
निचोड़ना
होता है
बुरा होता
भी है तो
बुरा नहीं
लगना होता है
होली की
शुभकामनाऐं
ले दे कर
सबको सब से
"बुरा ना मानो होली है"
बस कहना
होता है ।

शनिवार, 25 मई 2013

कमल बनना है तो कीचड़ पहले बना !

पढे़ लिखे लोग
यूं ही बुद्धिजीवी
नहीं कहलाते हैं
कभी देखा
कुछ हो भी जाये
उनके आस पास
बहुत सारे होते हैं
उसपर भी
कहने को कोई
कुछ नहीं आते हैं
कहते भी हैं तो
कान में कहते हैं
अखबार में नहीं
वो जो भी
छपवाते हैं
आई एस बी एन
होने पर ही
छपवाते हैं
माना कि तू भी
गलती से कुछ
पढ़ लिख ले गया
पर किस ने
कह दिया तुझसे
कि तू भी उसी
कैटेगरी का हो गया
हर बात पर
कुछ ना कुछ
कहने को चला
यहां आता है
गन्दी बातें बस
दिमाग में रखता है
गन्दगी यहाँ फैलाता है
देखा कभी कोई
पौसिटिव सोच वाला
तेरे से बात भी करना
कुछ चाहता है
निगेटिव देखता है
निगेटिव सोचता है
निगेटिव ही
बस फैलाता है
अब किसी कीचड़
फैलाने वाले को
यूँ ही फालतू में नहीं
गलियाना चाहिये
ये भी देखना चाहिये
अखबार में वो
कमल की तरह
दिख रहा है
इतना तो समझ
ही जाना चाहिये
कीचड़ अगर
नहीं फैलाया जायेगा
तो कमल कैसे
एक उगाया जायेगा
समझा कर
ये बात शायद
तेरे पिताजी ने तुझे
नहीं बतायी होगी
कमल बनाने के लिये
कीचड़ बनाने की विधि
तुझे नहीं समझाई होगी
देखता नहीं
तेरे आसपास के
सारे सफेदपोश
पैजामा उठा
कर चलते हैं
कीचड़ के छीटे
उछलते हैं तो
बस उछलते हैं
किसी को
उस कीचड़ से
कोई परेशानी
नहीं होती है
सरकार को
पता होता है
वो तो कमल की
दीवानी होती है
इसलिये
अब भी समय है
कुछ तो सुधर जा
पब्लिक को बेवकूफ
मत समझा कर
अपना भी समय
ऎसे वैसे में ना गंवा
कुछ काम धाम
करने की सोच बना
समान सोच के लोग
जो फैला रहे हैं कीचड़
उनकी शरण में जा
कमल ना भी बन पाया
तो कोई बात नहीं
कमल बनाने की
तकनीक सीख कर
वैज्ञानिक सोच ही
पैदा कर ले जा
कुछ प्रोजेक्ट ही ले आ
कुछ कर रहा है
वो ही चल दे दिखा ।

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

टीम स्प्रिट

चलो एक
दल बनायें
चलो देश
को बचायें

कांंग्रेस
भाजपा
सपा बसपा
सबको मिलायें

हाथ में कमल
को खिलायें
साईकिल को
हाथी पर चढ़ायें

चलो लोगों
को बतायें
एक रहने के
फायदे गिनायें

चलो
घंटियां बजाये
चुनाव
बंद करवायें

चलो
खर्चा बचायें
जो बचे
बांट खायें

चलो
ईमानदारी
दिखायें

चलो
उल्लू बनायें

चलो
दिल से
दिल मिलायें

चलो
प्रेम की
भाषा सिखायें

चलो
मिल कर
घूस खायें

चलो
अन्ना को
भगायें

चलो
लोकपाल
ले कर आयें
केजरीवाल
को फसांये

चलो
अब तो
समझ जायें
हंसी अपनी
ना उड़वाये

आडवाणी जी
का हाथ
सोनिया जी
को दे
कर आयें

चलो
सामने
तो आयें
पीछे पीछे
ना मुस्कायें

चलो
एक
दल बनायें

चलो
देश
को बचायें।

गुरुवार, 8 मार्च 2012

उ0 प्र0 2012

आधी बकवास 'उलूक' की आज के 'अमर उजाला' के पेज 9 पर छपी है बाकी बची खुची कहो पूरी कहो यहाँ नीचे पड़ी है।

बड़ी
मुश्किल से
हाथी काबू
में आया है
अगले पाँच
साल के लिये
बांध कर के
सुलाया है

महावत ही
खा रहा था
हाथी का खाना
बच ही नहीं
पा रहा था
कुछ उसके
अपने ही
परिवार के
लिये दाना

महावत
आज बहुत
खुश नजर
आ रहा था

अपनी
छकड़ा
साईकिल
निकाल कर
बहुत इतरा
रहा था

अगले
पाँच साल
वो साइकिल
में जाया करेगा

हाथी बेचारा
बैठे बैठे सूँड
हिलाया करेगा

मेरा कुछ
हो पायेगा
मुझे कुछ भी
नहीं मालूम
टूटे हाथ में
कमल मेरे
पहले की तरह
मुर्झाया करेगा

चार हजार
करोड़ के साथ
थोड़ा और कुछ
ही खा पाया था
हाथी सुना है

बचा हुवा
साईकिल की
रिपेयर में
काम आया करेगा

श्रीमती मेरी
दूध सब्जी गैस
के दामों पर
अभी भी चिल्लायेगी

क्या पता दीदी
की जगह भतीजे
को देख अब
वो मुस्कुरायेगी

आओ दुवा करो
मेरे साथ आप भी
मिलकर वोटरो

साईकिल बिना
रिपेयर के
पाँच साल
चल ही जायेगी
पैट्रोल के बिल
दिखा कर
एन आर एच एम
की कहानी
कम से कम फिर से
नहीं दोहरायेगी

कुछ बेकसूर
लोगो को
यूँ ही मौत
की नीद
असमय ही
ना सुलायेगी

अमन चैन
ना भी ला सकी
उसके सपने
तो दे ही जायेगी।

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

मौन की ताकत

कुछ मौन रहे
कुछ रहे चुप चुप
कुछ लगे रहे
कोशिश में
लम्बे अर्से तक
उनको सुनने
की छुप छुप
पर कहां कैसे
सुन पाते
कोई मूड में
होता सुनाने के
जो सुनाते
एक लम्बे दौर
का आतंक
अत्याचार भ्रष्टाचार
धीरे धीरे चुपचाप
गुमसुम बना देता है
हिलता रहता
मौनअंदर से सिमटते सिमटते
अपने को ठोस बना देता है
मजबूत बना देता है
ऎसे मौन की आवाज
कोई ऎसे ही कैसे
सुन सकता है
वो जो ना
बोल सकता है
ना कुछ कह सकता है
ऎसे सारे मौन
व्यक्त कर चुके हैं
अपने अपने आक्रोश
बना चुके हैं एक कोश
किसने क्या कहा
किसने क्या सुना
कोई नहीं जान पायेगा
पर हरेक का मौन
एक होकर अपनी बात
सबको एक सांथ
चिल्ला चिल्ला के सुनायेगा
आतंकियों भ्रष्टाचारियों
अत्याचारियों को
पता है मौन की बात
अब ये सारे लोग खुद
आतंकित होते चले जायेंगे
मौन ने बोये हैं
जो बीज इस बीच
प्रस्फुटित होंगे
बस इंतजार है कुछ
और दिनो का
धीरे धीरे सारे मौन
खिलते चले जायेंगे
किसका कौन सा
मौन रहा होगा
कोई कैसे जान पायेगा
जब सब से एक सा
एक सांथ प्रत्युत्तर पायेगा
खिलेगा मौन का फूल महकेगा
आतंक अत्याचार व्यभिचार
भ्रष्टाचार की जमीन पर
ठीक उसी कमल की तरह
जिसे कीचड़ में भी
खिलना मंजूर होता है।

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