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रविवार, 12 नवंबर 2017

बकवास ही कर कभी अच्छी भी कर लिया कर

किसी दिन तो
सब सच्चा
सोचना छोड़
दिया कर

कभी किसी
एक दिन
कुछ अच्छा
भी सोच
लिया कर

रोज की बात
कुछ अलग
बात होती है
मान लेते हैं

छुट्टी के
दिन ही सही
एक दिन
का तो
पुण्य कर
लिया कर

बिना पढ़े
बस देखे देखे
रोज लिख देना
ठीक नहीं

कभी किसी दिन
थोड़ा सा
लिखने के लिये
कुछ पढ़ भी
लिया कर

सभी
लिख रहे हैं
सफेद पर
काले से काला

किसी दिन
कुछ अलग
करने के लिये
अलग सा
कुछ कर
लिया कर

लिखा पढ़ने में
आ जाये बहुत है
समझ में नहीं
आने का जुगाड़
भी साथ में
कर लिया कर

काले को
काले के लिये
छोड़ दिया कर
किसी दिन
सफेद को
सफेद पर ही
लिख लिया कर

‘उलूक’
बकवास
करने
के नियम
जब तक
बना कर
नहीं थोप
देता है
सरदार
सब कुछ
थोपने वाला

तब तक
ही सही
बिना सर पैर
की ही सही
कभी अच्छी भी
कुछ बकवास
कर लिया कर ।

चित्र साभार: BrianSense - WordPress.com

मंगलवार, 26 नवंबर 2013

कर कुछ भी कर बात कुछ और ही कर

कुछ इधर
की बात कर
कुछ उधर
की बात कर

करना बहुत
जरूरी है
बेमतलब
की बात कर

समझ में
कुछ आये
कहा कुछ
और ही जाये
बातों की
हो बस बात
कुछ ऐसी ही
बात कर

इससे करे
तो उसकी
बात कर
उससे करे
तो इसकी
बात कर

जब हों
आमने
सामने
ये वो
तो मौसम
की बात कर

कुछ भी
करना
हो कर
जैसे भी
करना
हो कर

बात करनी
ही पड़े तो
कुछ नियम
की बात कर

थोड़ी चोरी
भी कर
कुछ
बे‌ईमानी
भी कर
बात पूरी
की पूरी
ईमानदारी
की कर

इसके पीने
की कर
उसके पीने
की कर
खुद के
बोतल में
गंगाजल
होने की
बात कर

कहीं भी
आग लगा
जो मन में
आये जला
बात
आसमान
से बरसते
हुऐ पानी
की कर

अपनी भूख
को बढ़ा
जितना खा
सकता है खा
बात भूखे
की कर
बात गरीबों
की कर

 बात
करनी है
जितनी भी
चाहे तू कर
बात करने
पर ही
नहीं लगता
है कर
यहां कोई
बात कर
वहां कोई
बात कर
बाकी पूछे
कोई कभी
कहना ऊपर
वाले से डर ।

शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

कुछ कर

उधर की
मत सोच
आज इधर
को आ

कुछ अलग
सा कर
माहौल बना

गुलाब एक
सोच में
अपनी ला
खुश्बू भीनी
किताब
में दिखा
स्वाद की
रंगीन फोटो
चल बना
प्यार की
फिलम देख
रिश्तों के
धागे सुलझा

ध्यान मत
अब भटका
उधर होने दे
इधर को आ

अपना अपना
सब को
करने दे
तू अपना
भी करवा

कोई किसी
के लिये
नहीं मर
रहा है
तू भी
मत मर
कुछ अलग
सा तो कर

मधुशाला
की सोच
साकी को
सपने में ला
फूलों के
गिलास बुन
पराग की
मय गिरा

टेड़ा हो जा
हरी हरी
दूब बिछा
लुड़क जा

जब देख
रहा है
सब को
बेहोश
अपने होश
भी कभी
तो उड़ा

उनसे अपना
जैसा करवाने
की छोड़
उनका जैसा
ही हो जा

चैन से
बैठ कर
जुगाली कर
चिढ़ मत
कभी चिढ़ा

चल अपना
आज अलग
तम्बू लगा

कर ना
कुछ अलग
तो कर

उसको
उसका
उधर
करने दे
तू कुछ
इधर
अपना
भी कर ।

शुक्रवार, 22 जून 2012

कर नया कुछ

चलिये आज कुछ
मूड बदल दिया जाये
कुछ रूमानी बातों में
दिल को अपने
जबरदस्ती  
धकेल
लिया जाये

कहाँ से करें शुरू
कि

मजा ही मजा हो जाये

पिताजी आज बिजली
वाला आया था
पुराने बहुत से बिल
जमा नहीं हुवे हैं
समझाने आया था

छोड़िये भी
रहने दीजिये
इधर से भी
ध्यान हटाते हैं
बारिश नहीं हो रही है
बहुत समय से
लोग बताते हैं
कुछ बादलों की
सोच कर
सपनों में ही सही
नमी ले आते हैं

सुनते हो जी
गैस का सिलिण्डर
वापिस आ गया है
मेट को गाड़ी वाले ने
वापिस लौटा दिया है
कल से स्टोव में
खाना बनाइयेगा
आज अभी जा के
कैरोसिन पाँच लीटर
जरा बाजार से
ब्लैक में ले आइयेगा

उफ एक कोशिश
अंतिम कोशिश
क्या पता मूड
बन ही जाये
अंधे के हाथ में
कानी बटेर कहीं
से आ जाये

इंद्रधनुष देखे सोचे हुवे
एक अर्सा बीत गया
रंगों को सब काला सफेद
मौका मिलते ही
हर कोई कर गया
चलो घर पर ही
उसे बना लिया जाये
बल्ब की तेज रोशनी करके
पानी की फुहारों को
हवा में उडा़या जाये

आम जनता को
सूचित किया जाता है
बिजली कटौती से
चूंकि पम्प नहीं
चल पाता है
अगले दो दिन पानी
नहीं आ पायेगा
जिसे प्यास लग ही गयी
बिसलेरी बाजार से
अपने लिये खरीद
के ले आयेगा

रहने भी दीजिये
किसी और दिन अब
खुश रहने का जुगाड़
कर लिया जायेगा
आज भी कटे फटे
मुद्दों पर ही ध्यान
लगाया जायेगा
पढ़ने वाले भी
इसी के आदी
हो चुके हैं
खाली कहीं नई
रंगीन बात छपी
देख कर यहां
किसी को तेज
बुखार आ जायेगा ।

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