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शनिवार, 23 दिसंबर 2017

चल रहा है सिलसिला लिखने लिखाने का फिर फिर वही बातें नया तो अब वैसे भी कहीं कुछ होना ही नहीं है

लिखना
सीख ही
रहा है
अभी भी

कई सालों से
लिखने वाला

क्या
लिख रहा है

क्यों
लिख रहा है

अभी तो
पूछना
ही नहीं है

शेर गजल
कविता भी
पढ़ रहा है

लिखी लिखाई
बहुत सी कई

शेर सोचने
और गजल
लिखने की

अभी तो
हैसियत
ही नहीं है

मत बाँध लेना
उम्मीद भी
किसी दिन

नया कुछ
लिखे
देखने की

सूरतें सालों
साल हो गये हैं

कहीं भी
कोई भी
अभी तो
बदली
ही नहीं हैं

किताबों में
लिख दी
गयी हैं

जमाने भर
की सभी
बातें कभी के

किसलिये
लिखता है
खुराफातें

जो किताबों
तक अभी
भी पहुँची
ही नहीं हैं

कल
लिख रहा था
आज
लिख रहा है
कल भी
लिखने के लिये
आ जायेगा

होना जब
कुछ भी
नहीं है
तो लिखने
की भी
जरूरत
ही नहीं है

अच्छा नहीं है
लिये घूमना
खाली गिलास
खाली बोतलों
के साथ
लिखने के
लिये शराबें

‘उलूक’
कुछ ना कुछ
पी रहा है
हर कोई
अपने
हिसाब का

समझाता
हुआ
जमाने को

पीने
पिलाने की
कहीं भी अब
इजाजत
ही नहीं है ।

चित्र साभार: Childcare

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

लिखने में अभी उतना कुछ नहीं जा रहा है

सभी के आसपास 
इतना कुछ होता है
जिसे वो अगर
लिखना चाहे तो
किताबें लिख सकता है
किसी ने नहीं कहा है
सब पर लिखना
जरूरी होता है
अब जो लिखता है
वो अपनी सोच
के अनुसार ही
तो लिखता है
ये भी जरूरी नहीं
जो जैसा दिखता है
वो वैसा ही लिखता है
दिखना तो ऊपर वाले
के हाथ में होता है
लिखना मगर अपनी
सोच के साथ होता है
अब कोई सोचे कुछ और
और लिखे कुछ और
इसमें कोई भी कुछ
नहीं कर सकता है
एक जमाना था
जो लिखा हुआ
सामने आता था
उससे आदमी की
शक्लो सूरत का भी
अन्दाज आ जाता था
अब भी बहुत कुछ
बहुतों के द्वारा
लिखा जा रहा है
पर उस सब को
पढ़कर के लिखने
वाले के बारे में
कुछ भी नहीं
कहा जा रहा है
अब क्या किया जाये
जब जमाना ही नहीं
पहचाना जा रहा है
एक गरीब होता है
अमीर बनना नहीं
बल्की अमीर जैसा
दिखना चाहता है
सड़क में चलने से
परहेज करता है
दो से लेकर चार
पहियों में चढ़ कर
आना जाना चाहता है
उधर बैंक उसको
उसके उधार के
ना लौटाने के कारण
उसके गवाहों को
तक जेल के अंदर
भिजवाना चाहता है
इसलिये अगर कुछ
लिखने के लिये
दिमाग में आ रहा है
तो उसको लिखकर
कहीं भी क्यों नहीं
चिपका रहा है
मान लिया अपने
इलाके में कोई भी
तुझे मुँह भी
नहीं लगा रहा है
दूसरी जगह तेरा लिखा
किसी के समझ में
कुछ नहीं आ रहा है
तो भी खाली परेशान
क्यों हुऎ जा रहा है
खैर मना अभी भी
कहने पर कोई लगाम
नहीं लगा रहा है
ऎसा भी समय
देख लेना जल्दी ही
आने जा रहा है
जब तू सुनेगा
अखबार के
मुख्यपृष्ठ में
ये समाचार
आ रहा है  
गांंधी अपनी
लिखी किताब
“सत्य के साथ 

किये गये प्रयोग “
के कारण मृ्त्योपरांत
एक सदी के लिये
कारावास की सजा
पाने जा रहा है ।

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