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गुरुवार, 25 जनवरी 2018

गणों को तंत्र के शुभकामनाएं आज के लिये कल से फिर लग लेना है सजाने अपनी अपनी दुकान को


कहाँ जरूरत है
किसे जरूरत है
पढ़ने याद करने
या समझने की
संविधान को



कुछ दिन होते हैं
बस करने को सलाम
दूर ऊपर देखते हुऐ
फहराते हुऐ तिरंगे को
और नीले आसमान को




किसने कह दिया
चलते रहिये
बने हुऐ
रास्तों पर पुराने
बना कर पंक्तियाँ
मिला कर कदम
बचा कर
अपने स्वाभिमान को


उतर कर तो देखिये
बाहर किनारे
से सड़क के लेकर
भीड़ एक बेतरतीब
चिल्लाते हुऐ कहीं
किसी बियाबान को

सभी कुछ सीखना
जरूरी नहीं है
लिखी लिखाई
किताबों से पढ़कर
एक ही बात को
रोज ही सुबह
और शाम को


दिख रही है
मौज में आयी हुई
तालीमें घर की
सड़क पर पत्थर
मारती हुई बच्चों
के मुकाम को



सम्भाल कर
रखे हुऐ है पता नहीं
कब से सोच में
तीन रंग झंडा एक
और कुछ दुआएं
अमनोचैन की
याद करते हुए
मुल्क-ए-राम को


लगा रहता है
‘उलूक’
समझने में
झंडे के बगल में
आ खड़े हुऐ
एक रंगी झंडे
की शखसियत
सत्तर मना लिये
कितने और भी
मनायेगा अभी
गणतंत्र दिवस
बढ़ाने को
गणों के
सम्मान को ।



चित्र साभार: https://www.canstockphoto.com

बुधवार, 25 जनवरी 2017

बधाई है बधाई है बधाई है बधाई है

गण हैं
तंत्र है
सिपाही हैं

झंडा है
एक है
तिरंगा है

आजाद हैं
आजादी है
शहनाई हैं
देश है
जज्बा है
सेवा है

मिठाई है
मलाई है
मेवा है

चुनाव हैं
जरूरी हैं
लड़ना है
मजबूरी है

दल है
बल है
कोयला है
कोठरी हैं

काजल है
धुलाई है
निरमा है
सफेद है
जल है
सफाई है

दावेदारी है
दावेदार हैं
कई हैं
प्रबल हैं

इधर हैं
उधर हैं
इधर से
उधर हैं
उधर से
इधर हैं

खुश हैं
खुशी है
शोर है
आवाजाही है

चश्मा है
लाठी है
धोती है
काली है
सूची है
नाम लेने
की भी
मनाही है

सिल्क है
अंगूठी है
कलफ है
कोठी है
वाह है
वाहवाही है

छब्बीस है
जनवरी है
सालों से
आई है

आती है
जाती है
आज
फिर से
चली आई है

शरम की
बात नहीं
बेशर्मी नहीं
बेहयाई नहीं
‘उलूक’ की
चमड़ी
खुजली
वाली है
खुजलाई है

कबूतरों की
बारात है
देखी कहीं
एसी कभी
कौओं की
अगुआई है
कौओं ने
सजाई है

गण हैं
तंत्र है
सिपाही हैं
झंडा है
बधाई है
बधाई है
बधाई है
बधाई है ।

चित्र साभार: www.fotosearch.com

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