http://blogsiteslist.com
चैन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चैन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 20 अप्रैल 2014

वोट देना है जरूरी बहुत महंगा वोट हो रहा है

बहुत ज्यादा नहीं
बस थोड़ा बहुत
ही तो हो रहा है
कहीं कुछ हो रहा है
तभी तो थोड़ा सा
खर्चा भी हो रहा है
आय व्यय
लेखा जोखा
कोई कहीं भी
बो रहा है
तुझे किस बात
की परेशानी है
तू किस के टके
पैसे के लिये
रो धो रहा है
देश का सवाल है
देश के लिये
ही हो रहा है
कुछ किताबों में
लिखा जा रहा है
कुछ बाहर बाहर
से ही इधर उधर
भी हो रहा है
मेहनत का नतीजा है
खून और पसीना
एक हो रहा है
पाँच साल में
पाँच सौ गुना
बताना जरा सोच कर
और किधर हो रहा है
शेयर बाजार में
उतार और चढ़ाव
इस से ही हो रहा है
तेरे देश के ही
नव निर्माण के लिये
नया बाजार नई दुकानों
और नये दुकानदारों
के साथ तैयार अब
फिर से हो रहा है
वोटरों की संख्या से
कुल खर्चे को भाग
क्यों नहीं दे रहा है
पता चलेगा तुझे
वोट का भाव
इस बार कितना
ज्यादा हो रहा है
पाँच साल में
हजार का करोड़
कहाँ हो रहा है
देश वाले ही हैं
जिनकी तरक्की में
तेरा योगदान भी
तो हो रहा है
उठ ‘उलूक’
दिन में बैठा
चैन से कैसे
तू सो रहा है
देने क्यों नहीं
जा रहा है वोट
वोट देने से
कौन सा कोई
शहीद हो रहा है ।

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

भूख भगा डबलरोटी की सोच ले और सो जा


उसे ये बता कर
कि कल रात से
बगल में मेरे वो
भूखा है सोया हुआ
मुझे अपनी आफत
नहीं बुलानी है
जो एक्स्पायरी डेट
छपे हुऎ डिब्बा बंद
खाना बनाने की
तकनीक का कंंसेप्ट
सीखकर मेरे और
मेरे आस पास के
भूखे लोगों को
तमीज सिखाने
भिजवाया गया है
वो चाँद सोचता है
और बस चाँद
ही खोदता है
भूखों के लिये
रोटी के सपने
तैयार करने
वाली मशीन
का कंंसेप्ट उसे
देने वाला अब
भूखों को
उलझाता है
इधर जब
ये प्यार से
झुनझुना
बजाता है
इस तरह
उसपर से
बोझ सारा
अपने ऊपर
ले आता है
चिन्ता सारी
त्याग कर
वो चैन से
चाँद खोदने
चाँद की ओर
चला जाता है
एसे ही धीरे धीरे
एक सभ्य समाज
का निर्माण हम
भूखों के लिये
हो जायेगा
क्योंकी बहुत से
लोगों को चाँद
सोचने का मौका
हथियाने का
तमीज आ जायेगा
मैं और मेरे जैसे
भूखे भी सीख लेंगे
एक दिन चाँद की
तरफ देखने की
हिम्मत कर ले जाना
और भूखे पेट
लजीज खाने के
सपने बेच कर
चैन से सो जाना ।

रविवार, 10 जून 2012

लेखक मुद्दा पाठक

कोई चैन से
लिखता है
कोई बैचेनी
सी दिखाता है

डाक्टर
के पास
दोनो ही
में से कोई
नहीं जाता है

लिख लेने
को ही अपना 
इलाज बताता है 

विषय हर
किसी का
बीमारी है
या नहीं की
जानकारी
दे जाता है

कोई मकड़ी
की टाँगों में
उलझ जाता है

कोई किसी
की आँखों में
घुसने का
जुगाड़ बनाता है

किसी को
सत्ता पक्ष
से खुजली
हो जाती है

विपक्षियों
की उपस्थिति
किसी पर
बिजली गिराती है

पाठक भी
अपनी पूरी
अकड़ दिखाता है

कोई क्या
लिखता है
उस पर
कभी कभी
दिमाग लगाता है

जो खुद
लिखते हैं
वो लिखते
चले जाते हैं

कुछ नहीं
लिखने वाले
इधर उधर
नजर मारते
हुवे कभी
नजर आ जाते हैं

हर मुद्दे पर
कुछ ना कुछ
लिखा हुवा
मिल ही जाता है

गूगल
आसानी से
उसका पता
छाप ले जाता है

किसी को
एक पाठक भी
नहीं मिल पाता है

कोई सौ सौ
को लेकर
अपनी ट्रेन
बनाता है

कुछ भी हो
लिखना पढ़ना
बिना रुके
अपने रास्ते
चलता चला
जाता है

मुद्दा भी
मुस्कुराता है
अपने काम पर
मुस्तेदी से
लगा हुवा
इसके बाद भी
नजर आता है।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...