उलूक टाइम्स: दोहे
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बुधवार, 10 जनवरी 2018

क्या लिखना है इस पर कुछ नहीं कहा गया है हिन्दी सीखिये रोज कुछ लिखिये गुरु जी ने वर्षों पहले एक मन्त्र दिया है

वृन्द के दोहे
‘करत करत
अभ्यास के
जड़मति
होत सुजान’
के
याद आते ही
याद आने शुरु
हो जाते हैं


हिन्दी के
मास्टर साहब
श्यामपट चौक
हिन्दी की कक्षा

याद आने
लगता है
‘मार मार कर
मुसलमान
बना दूँगा मगर
हिन्दी जरूर
सिखा दूँगा’
वाली उनकी
कहावत में
मुसलमान
शब्द का प्रयोग

और जब भी
याद आता है
उनका दिया
गुरु मन्त्र

‘लिख
कर पढ़
फिर पढ़
कर समझ’

जड़मति
‘उलूक’
फिर से लिखना
शुरु हो जाता है

लिखना
रोज का रोज
वो सब जो
उसकी समझ में
नहीं आ पाता है

लिखते लिखते
पता नहीं कितना
कितना लिखता
चला जाता है

ना जड़ मिलती है
ना मति सुधरती है
ना ही मुसलमान
हो पाता है

मार पड़ने का
तरीका बदलता
चला जाता है

मार खाता है
लिखता है
लिख कर
चिल्लाता है

फिर भी
ना जाने क्यों
ना हिन्दी ही
आ पाती है

ना
समझ ही
अपनी समझ
को समझ
पाती है

एक पन्ने के
रोज के
अभ्यास को
पढ़ने के लिये

कोई
आता है
कोई नहीं
आता है

कहाँ पता
हो पाता है
यही
‘करत करत
अभ्यास के
जड़मति
होत सुजान’

उससे
पता नहीं
कब तक
कितना कितना
और ना जाने
क्या क्या आगे
लिखवाता है ?

चित्र साभार: http://www.clipartguide.com

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

छ से छन्द

कविता सविता
तो तब लिखता
अगर गलती से
भी कवि होता

मैं सिर्फ
बातें बनाना
जानता हूँ
छंद चौपाई
दोहे नहीं
पहचानता हूँ

रोज दिखते
हैं यहां कई
उधार लेकर
जिंदगी बनाते

कुछ जुटे
होते हैं
फटती हुवी
जिंदगी में
पैबंद लगाते

जो देखता
सुनता
झेलता
हूँ अपने
आस पास
कोशिश कर
लिख ही
लेता हूँ
उसमें से
कुछ
खास खास

ऎसे में
आप कैसे
कहते हो
छंद बनाओ
हमारी तरह
कविता एक
लिख कर
दिखाओ

गुरु आप
तो महान हो
साहित्य जगत
की एक
गरिमामय
पहचान हो

खाली दिमाग
वालों पर
इतना जोर
मत लगाओ
बेपैंदे के
लोटे को तो
कम से कम
ना लुढ़काओ

क से कबूतर
लिख पा
रहा हो
अगर
कोई यहां
गीत लिखने
की उम्मीद
उससे तो
ना ही लगाओ

हो सके
तो उसे  

ख से
खरगोश
ही
सिखा जाओ

नहीं कर
सको
इतना भी
तो
कम से कम
उसके लिये
एक ताली ही
बजा जाओ।