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शनिवार, 9 दिसंबर 2017

अचानक से सूरज रात को निकल लेता है फिर चाँद का सुबह सवेरे से आना जाना शुरु हो जाता है

जब भी कभी
सैलाब आता है
लिखना भी
चाहो अगर कुछ

नहीं लिखा जाता है

लहरों के ऊपर
से उठती हैं लहरें
सूखी हुई सी कई
बस सोचना सारा
पानी पानी सा
हो जाता है

इसकी बात से
उठती है जरा
सोच
एक नयी
उसकी याद
आते ही सब  
पुराना पुराना
सा हो जाता है

अचानक नींद से
उठी दिखती है
सालों से सोई
हुई कहीं
की एक भीड़


फिर से तमाशा
कठपुतलियों का
जल्दी ही कहीं
होने का आभास
आना शुरू

हो जाता है

जंक लगता नहीं है
धागों में पुराने
से पुराने कभी भी
उलझी हुई गाँठों
को सुलझाने में
मजा लेने वालों
का मजा दिखाना 

शुरु हो जाता है 

पुरानी शराबें
खुद ही चल देती हैं
नयी बोतल के अन्दर
कभी इस तरह भी
‘उलूक’
शराबों के मजमें
लगे हुऐ जब कभी
एक लम्बा जमाना
सा हो जाता है ।

चित्र साभार: recipevintage.blogspot.com

बुधवार, 8 मार्च 2017

गीता में कही गयी हैं बातें वही तो हो रही हैं नजर आ रहा है मत कहना ‘उलूक’ पगला रहा है


सीधी बोतल
उल्टी कर
खाली करना
फिर खाली
बोतल में
फूँक मार कर
कुछ भरना


रोज की
आदत हो
गयी है
देखो तो
खाली बोतलें
ही बोतलें
चारों ओर
हो गयी हैं

कुछ बोतलें
सीधी पड़ी
हुई हैं
कुछ उल्टी
सीधी हो
गयी हैं

बहुत कुछ
उल्टा सीधा
हुआ जा
रहा है
बहुत कुछ
सीधा उल्टा
किया जा
रहा है

पूछना
मना है
इस लिये
पूछा ही नहीं
जा रहा है

जो कुछ भी
हो रहा है
स्वत: हो
रहा है
होता चला
जा रहा है

जरूरत ही
नहीं है
किसी को
कुछ
पूछने की

कोई पूछने भी
नहीं आ रहा है

वो उसके लिये
लगा है उधर
गाने बजाने में

इसको इसके
लिये इधर
खुजलाने में
मजा आ रहा है

गधों की दौड़
हो गयी है
सुनाई दे रही है

खबर बहुत
दिनों से
हवा हवा
में है
और
होली भी
आ रही है

गधों में सबसे
अच्छा गधा भी
जल्दी ही
गधों के लिये
भेजा जा रहा है

‘उलूक’
तूने पेड़
पर ही
रहना है
रात गये ही
सुबह की
बात को
कहना है

तुझे
किस बात
का मजा
आ रहा है

खेलता रह
खाली
बोतलों से

गधे
का आना
फिर गधे
का जाना

कृष्ण जी
तक बता
गये हैं
गीता में

गधों के
बीच में
चल रही
उनकी
अपनी
बातें हैं

बोतलों में
फूँकने वाला
क्या फूँक
रहा है
जल्दी ही
होली
से पहले
सबके
सामने से
आ रहा है

किसलिये
छटपटा
रहा है ?

चित्र साभार: Dreamstime.com

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

खरीददार

रद्दी बेच डाल
लोहा लक्कड़
बेच डाल
शीशी बोतल
बेच डाल

पुराना कपड़ा
निकाल
नये बर्तन में
बदल डाल

बैंक से उधार
निकाल
जो
जरूरत नहीं
उसे ही
खरीद डाल
होना जरूरी है
जेब में माल

बाजार
को घर
बुला डाल
माल नहीं है
परेशानी
कोई
मत पाल

सब
बिकाउ है
जमीर ही
बेच डाल

बस एक
मेरी
परेशानी
का तोड़
निकाल

बैचेनी है
बेचनी
कोई तो
खरीददार
ढूँढ निकाल।

चित्र साभार: Active India

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