उलूक टाइम्स

गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

रास्ते का खोना या खोना किसी का रास्ते में

किसी
जमाने में
रोज आते थे
और
बहुत आते थे

अब नहीं आते
और जरा सा
भी नहीं आते

रास्ते
इस शहर के
कुछ बोलते नहीं

जो
बोलते हैं कुछ
वो
कुछ बताते ही नहीं

उस जमाने में
किस लिये आये
किसी ने
पूछा ही नहीं

इस जमाने में
कैसे पूछे कोई
वो अब
मिलता ही नहीं

रास्ते वही
भीड़ वही
शोर वही

आने जाने
वालों में
कोई नया
दिख रहा हो
ऐसा जैसा
भी नहीं

सब
आ जा रहे हैं
उसी तरह से
उन्हीं रास्तों पर

बस
एक उसके
रास्ते का
किसी को
कुछ पता ही नहीं

क्या खोया
वो या
उसका रास्ता
किससे पूछे
कहाँ जा कर कोई

भरोसा
उठ गया
‘उलूक’
जमाने का

उससे भी
और
उसके
रास्तों से भी

पहली बार
सुना जब से
रास्ते को ही
साथ लेकर अपने
कहीं खो गया कोई ।

चित्र साभार: www.clipartpanda.com