हर काम को
ठेके के हिसाब से करने की
ठेके के हिसाब से करने की
आदतें हो जाती है
ठेकेदारी घर से ही जब शुरु की जाती है
गली मौहल्ले शहर राज्य से होते हुऐ
देश तक भी तभी ले जाई जाती है
कहीं कोई निविदा
नहीं निकाली जाती है
काम ठेकेदार के हाथ में
दिखने के बाद ही
ठेके की कीमत आंकी जाती है
ठेके की कीमत आंकी जाती है
ठेके लेने के लिये
किसी भी तरह की
योग्यता एक बना ली जाती है
जो कभी कभी ठेके देने वाले की
मूंछ की लम्बाई से भी निकाली जाती है
योग्यता एक बना ली जाती है
जो कभी कभी ठेके देने वाले की
मूंछ की लम्बाई से भी निकाली जाती है
आकाश पृथ्वी हवा के ठेके
तक भी लिये जाते हैं
किसने दिये किससे लिये
कौन कहां किस किस को
जा जा कर बताते हैं
जा जा कर बताते हैं
कोई भी अपने आप को
एक ठेकेदार मान ले जाता है
एक ठेकेदार मान ले जाता है
जिस चीज पर दिल आ जाये
उस का वो एक ठेकेदार हो जाता है
उस का वो एक ठेकेदार हो जाता है
किसी दूसरी चीज पर दूसरा ठेकेदार
अपनी किस्मत आजमाता है
अपनी किस्मत आजमाता है
ठेकेदार की भाषा को
ठेकेदार ही बस समझ पाता है
ठेकेदार ही बस समझ पाता है
एक ठेकेदार
हमेशा दूसरे ठेकेदार से रिश्तेदारी
पर जरूर निभाता है
कभी खुद के लिये एक तलवार
कभी दूसरे के लिये ढाल तक हो जाता है
कभी दूसरे के लिये ढाल तक हो जाता है
छोटे छोटे ठेकों से होते हुऐ ठेकेदार
कब एक बड़ा ठेकेदार हो जाता है
ठेकेदार को भी पता नहीं चल पाता है
अपने घर को ठेके पर लगाते लगाते
जिस दिन पूरे देश को
ठेके पर देने के लिये उतर आता है
ठेके पर देने के लिये उतर आता है
उसी दिन समझ में ये सब आता है
ठेका लेना हो अगर किसी भी चीज का
तो किसी से कुछ कभी नहीं पूछा जाता है
बस ठेका ले ही लिया जाता है।
हमें हर चीज ठेके पर देनें की आदत हो गयी है !
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर .
जवाब देंहटाएंआप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल {बृहस्पतिवार} 19/09/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" पर.
जवाब देंहटाएंआप भी पधारें, सादर ....राजीव कुमार झा
आपकी यह प्रस्तुति 19-09-2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत है
जवाब देंहटाएंकृपया पधारें
धन्यवाद
एकदम सही। हर काम ठेके पर, ज़िम्मेदारी का पूर्णाभाव ...
जवाब देंहटाएंएकदम सही
जवाब देंहटाएंबेहतरीन प्रस्तुति
downloading sites के प्रीमियम अकाउंट के यूजर नाम और पासवर्ड
बढ़िया -
जवाब देंहटाएंआभार आदरणीय-
बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 20/09/2013 को
जवाब देंहटाएंअमर शहीद मदनलाल ढींगरा जी की १३० वीं जयंती - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः20 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra
बहुत बढ़िया रचना सुशील जी
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