उलूक टाइम्स

"बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा " :- शौक़ बहराइची

शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

पिता होना बात तो है पर राष्ट्रपिता होना ? कभी न चाहते हुए भी कुछ लिखना जरूरी हो जाता है

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हम हैं कितना हैं हमको आभास है अपने उतना होने का हम बिल्कुल भी नहीं थे जब तुम थे पूरे से भी जियादा तुम नहीं थे तब हम हैं कितना हैं पता नहीं ह...
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रविवार, 30 नवंबर 2025

लिखना कूड़ा कुछ फैलाना सफाई से कुछ

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  कुछ वो भी नहीं लिख रहे कुछ कुछ हम भी नहीं लिख रहे कुछ   कहीं वो भी नहीं दिख रहे हैं कुछ वहीं हम भी नहीं दिख रहे हैं कुछ कहा है उन्होंने ...
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सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

शुभ हो मंगलमय हो प्रकाश मय हो बाहर भीतर ऊपर नीचे नौ दिशाएं जमीन आसमान

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सभी के पास होते हैं मिट्टी के दिए रुई की बाती तेल और दियासलाई जलाने के लिए कुछ भी कहीं भी कभी भी सभी को जरूरत होती है रोशनी की सभी चाहते है ...
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सोमवार, 22 सितंबर 2025

समय के हिसाब से गिरगिटिया सहूर हजूर के हिसाब से कुछ रंग बदलना सीख

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हौले हौले से कर आंखे बंद ध्यान में कुछ लिखना सीख उसके बाद साध कान को बांध आवाज को व्यवधान में कुछ लिखना सीख उसके बाद बंद कर मुंह दिल में गुन...
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बुधवार, 17 सितंबर 2025

राम को लिखते हैं खत बस एक डाकखाना नहीं मिलता

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  तेरे लिखे हुए में अपना अक्स नहीं मिलता   और अपने लिखे हुए में आईना नहीं मिलता   ख्वाहिश देखने की खुद को अपने हिसाब से अपनी कहीं भी देखो खु...
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सुशील कुमार जोशी
Almora, Uttarakhand, India
ना कविता लिखता हूँ ना कोई छंद लिखता हूँ अपने आसपास पड़े हुऎ कुछ टाट पै पैबंद लिखता हूँ ना कवि हूँ ना लेखक हूँ ना अखबार हूँ ना ही कोई समाचार हूँ जो हो घट रहा होता है मेरे आस पास हर समय उस खबर की बक बक यहाँ पर देने को तैयार हूँ ।
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