यूँ ही अचानक
कैसे हुआ इतना बड़ा कुछ
तब तक समझ में नहीं आयेगा
उसके धीरे धीरे थोड़ा थोड़ा होने के निशान रोज के
अपने आसपास अगर देख नहीं पायेगा
इतने दिन भी नहीं हुऐ हैं
कि याद ना आयें खरोंचें लगी हुई सोच पर
और भूला जाये रिसता हुआ कुछ
जो ना लाल था ना ही उसे रक्त कहना सही होगा
अपने आस पास के नंगे नाँचों के बगल से
आँख नीची कर के निकल जाने को
वैसे याद नहीं आना चाहिये
भूल जाना सीखा जाता है
यद्यपि वो ना तो बुढ़ापे की निशानी होता है
ना ही उसे डीमेंशिया कहना ठीक होगा
ऐसे सारे महत्वाकाँक्षाओं के बबूल बोने के लिये
सौंधी मिट्टी को रेत में बदलते समय
ना तो शर्म आती है ना ही अंधेरा किया जाता है
छोटे छोटे चुभते हुवे काँटो को
निकाल फेंकने के लिये भी समय कहाँ होता है
बूँद दर बूँद जमा होते चले जाते हैं
सोच की नर्म खाल को ढकते हुऐ से
मोमबत्तियाँ तो सम्भाल कर ही रखी जाती हैं
जरा सा में टूट जाती हैं
मोम बिना जलाये भी बरबाद हो जाता है समय के साथ
और हर बार एक दुर्घटना फिर झिंझोड़ जाती है
पूछते हुऐ कितनी बार और
किस किस छोटी घटना से
बचते हुऐ अपने आसपास की आँखे फेरेगा ‘उलूक’
जो दिखाई और सुनाई दे रहा है
वो अचानक नहीं हुआ है
महत्वाकाँक्षाओं के मुर्दों के कफनों के
जुड़ते चले जाने से बना
विशाल एक झंडा हो गया है
जो लहरायेगा बिना हवा के
ढक लेगा सोच को
कहीं कुछ भी
नजर आने लायक नहीं रह जायेगा
सौंधी मिट्टियों से बनी रेत की
आँधियों में सब उड़ जायेगा
कुछ नहीं बचेगा
महत्वाकाँक्षाओं के भूतों से लबालब
एक शमशान हो जायेगा।

परेशानी
जवाब देंहटाएंऔर कुछ नही
सरकार के बनाए
हालात है सब
सादर नमन...
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (04-12-2019) को "आप अच्छा-बुरा कर्म तो जान लो" (चर्चा अंक-3539) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 03 दिसम्बर 2019 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंउलूक टाइम्स ब्लॉगर्स के बीच आज काफी पॉपुलर हो चुकी है। हमेशा यहाँ कुछ नया पढ़ने को मिलता है। ऐसे ही लिखते रहिये और नई नई रचनाएँ लोगों तक पहुंचाते रहिये। हम लाइफस्टाइल के ऊपर लेख लिखते हैं हमारे द्वारा लिखे लेख पढ़ने के लिए नीचे क्लिक कर सकते हैं।
जवाब देंहटाएंHealth Benefits of Carom Seeds in Hindi
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महत्वाकाँक्षाओं
जवाब देंहटाएंके बबूल
बोने के लिये
सौंधी मिट्टी
को
रेत में
बदलते समय
ना तो
शर्म आती है
ना ही
अंधेरा
किया जाता है,
-शर्म नाम की चीज़ बची हो तब न !
bahut achhi article likhi hai aapne
जवाब देंहटाएंashwagandha benefits in hindi