रविवार, 31 मई 2026

तिलचट्टे तिलचट्टे तिलचट्टे बस तिलचट्टे



सभी यहीं हैं कई कई हैं
यट्टे बट्टे सट्टे कट्टे
कितने कितने गिनते गिनते
मौज मनाते तिलचट्टे

इसने लिक्खे उसने लिक्खे
शब्द जोड़ कर हट्टे कट्टे
हवा में उड़ते फर फर फिरते
खिल खिलाते तिलचट्टे

इसके खाए उसके खाए
राजा लाए चोखे लिट्टे
खुशबू पाए घर घर जाए
पाले पोसे तिलचट्टे

किसने पढ़ने किसने लिखने
ढोल बजाते गिरगिट गिट्टे
आंख मूद कर कूद कूद कर
गाने गाएं तिलचट्टे

जिसकी सुलगी उसने उगली
गली गली कित्ते कित्ते
तुलसी सूर कबीर जायसी
लगते आज बित्ते बित्ते

छोड़ ‘उलूक’ मना मौज
रहने दे खुजली
घिस घर पर ही सिलबट्टे
लिखने दे लिखते रहते हैं
उड़ते गिरते चिढ़ते चिढ़ते
तिलचट्टे ही तिलचट्टे |

चित्र साभार: https://www.vecteezy.com/

9 टिप्‍पणियां:

  1. तिलचट्टों ने बहुतों की नींद हराम कर दी है.
    इन्हें मारनेवाले कीटनाशक का मुफ़्त में प्रचार हो रहा है. दिल्ली में तो सत्ताधारी दल के पार्षद स्प्रे लेकर पहुँच गये.
    सादर प्रणाम सर.

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  2. शुद्ध सात्विक प्रस्तुति
    वंदन

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  3. वाह! तिलचट्टे भी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे होंगे, आजकल हर जगह उन्हीं की चर्चा हो रही है

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  4. वाह ! क्या खूब लिखा। हम सब तिलचट्टे। तिलचट्टे ही तिलचट्टे

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  5. आहा ... सटीक व्यंग ... कहा कहाँ नहीं हैं तिलचट्टे ...

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  6. Wahhh
    अद्भुत तिलचट्टा पुराण 😃

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  7. बेचारा तिलचट्टा छूपत छुपाते प्रसिद्ध हो गया !
    सामयिक तिलचट्टे पर सामयिक लाजवाब रचना
    तुलसी सूर कबीर जायसी
    लगते आज बित्ते बित्ते
    क्या बात👌

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