सभी यहीं हैं कई कई हैं
यट्टे बट्टे सट्टे कट्टे
कितने कितने गिनते गिनते
मौज मनाते तिलचट्टे
इसने लिक्खे उसने लिक्खे
शब्द जोड़ कर हट्टे कट्टे
हवा में उड़ते फर फर फिरते
खिल खिलाते तिलचट्टे
इसके खाए उसके खाए
राजा लाए चोखे लिट्टे
खुशबू पाए घर घर जाए
पाले पोसे तिलचट्टे
किसने पढ़ने किसने लिखने
ढोल बजाते गिरगिट गिट्टे
आंख मूद कर कूद कूद कर
गाने गाएं तिलचट्टे
जिसकी सुलगी उसने उगली
गली गली कित्ते कित्ते
तुलसी सूर कबीर जायसी
लगते आज बित्ते बित्ते
छोड़ ‘उलूक’ मना मौज
रहने दे खुजली
घिस घर पर ही सिलबट्टे
लिखने दे लिखते रहते हैं
उड़ते गिरते चिढ़ते चिढ़ते
तिलचट्टे ही तिलचट्टे |
चित्र साभार: https://www.vecteezy.com/

तिलचट्टों ने बहुतों की नींद हराम कर दी है.
जवाब देंहटाएंइन्हें मारनेवाले कीटनाशक का मुफ़्त में प्रचार हो रहा है. दिल्ली में तो सत्ताधारी दल के पार्षद स्प्रे लेकर पहुँच गये.
सादर प्रणाम सर.
शुद्ध सात्विक प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंवंदन
वाह! तिलचट्टे भी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे होंगे, आजकल हर जगह उन्हीं की चर्चा हो रही है
जवाब देंहटाएंवाह, बेहतरीन रचना,
जवाब देंहटाएंवाह ! क्या खूब लिखा। हम सब तिलचट्टे। तिलचट्टे ही तिलचट्टे
जवाब देंहटाएंआहा ... सटीक व्यंग ... कहा कहाँ नहीं हैं तिलचट्टे ...
जवाब देंहटाएंलाजबाब
जवाब देंहटाएंWahhh
जवाब देंहटाएंअद्भुत तिलचट्टा पुराण 😃
बेचारा तिलचट्टा छूपत छुपाते प्रसिद्ध हो गया !
जवाब देंहटाएंसामयिक तिलचट्टे पर सामयिक लाजवाब रचना
तुलसी सूर कबीर जायसी
लगते आज बित्ते बित्ते
क्या बात👌