रास्ते अब दूर दूर तक कहीं भी
आसपास अपने नजर नहीं आते हैं
आसपास अपने नजर नहीं आते हैं
किसी ने अभी याद दिलाया मगर
हम तो कहीं भी आते जाते नहीं हैं
हम तो कहीं भी आते जाते नहीं हैं
छोड़ ही दिए तेरे बताए सारे रास्ते
रास्तों में ही कहीं नहीं बताते हैं
रास्तों में ही कहीं नहीं बताते हैं
किसने चलना है अब कहीं
तेरा नाम आते ही रास्ते बदल जाते हैं
तेरा नाम आते ही रास्ते बदल जाते हैं
परछाइयां ढक दी गई हैं मूर्तियों की
बुत के चित्र से आग जलाते हैं
बुत के चित्र से आग जलाते हैं
कैसे करे कोई तर्पण कोई अर्पण
यहाँ खंजर बेबात पर निकल जाते हैं
यहाँ खंजर बेबात पर निकल जाते हैं
तू मानुष ही रहा ताजिंदगी जहाँ
वहां आदमी के मंदिर बनाए जाते हैं
वहां आदमी के मंदिर बनाए जाते हैं
तेरे बारे में बातें करें भी करें कैसे
सत्य ही अहिंसा को अधर्म बताते हैं
सत्य ही अहिंसा को अधर्म बताते हैं
‘उलूक’ कैसे बचेगा कब तक बचेगा
रोशनी सारे अंधे अब अंधेरे में ही पढ़ाते हैं
रोशनी सारे अंधे अब अंधेरे में ही पढ़ाते हैं
बापू आ ही जाना याद कल भी चलो
जब तक लाठी चश्मे धोती हम नहीं बेच खाते हैं |
चित्र साभार: https://www.google.com/
जब तक लाठी चश्मे धोती हम नहीं बेच खाते हैं |
चित्र साभार: https://www.google.com/

आदरणीय सर,आधुनिक समाज की नैतिक गिरावट, दिखावे और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों के प्रति बढ़ती बेरुखी पर एक तीखा व्यंग्य। बापू के आदर्शों के प्रति समाज की झूठी निष्ठा को उजागर करते हुए आत्मचिंतन की प्रेरणा देती आपकी अभिव्यक्ति बेहद बहुमूल्य है।
जवाब देंहटाएंसादर प्रणाम सर
बहुत आभार आपका।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २ अक्टूबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
आभार
हटाएंपियारे बापू,
जवाब देंहटाएंआप आए आए तो आए
संग शास्त्री जी को भी लेआए
अब आ ही गए हो तो
बधाइया भी लेते जाइए
वंदन
आभार
हटाएंराष्ट्रनायकों को नमन
जवाब देंहटाएंऔर
आपको जन्मदिन 🎁 की बधाई
आभार
हटाएंभावपूर्ण भावाभिव्यक्ति ।जन्मदिन की हार्दिक बधाई सर!
जवाब देंहटाएंआभार
हटाएंवाह! बहुत सुंदर !
जवाब देंहटाएंआभार
हटाएंसामाजिक संदर्भ और आदर्श बदल गये हैं. सार्थक रचना
जवाब देंहटाएंजन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाए
आभार
हटाएंवाह! सुंदर।🙏🏼
जवाब देंहटाएंआभार
हटाएंसुन्दर कृति
जवाब देंहटाएंआभार
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