उलूक टाइम्स

"बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा " :- शौक़ बहराइची

सोमवार, 2 नवंबर 2009

भारत की पचासवीं वर्षगांठ

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प्रतीक्षा में हूँ उन सर्द  हवाओं की जो मेरी  अन्तरज्वाला  को शांत करें । प्रतीक्षा में हूँ उन गरम  फिजाओं की जो मेरे  ठंडेपन को कुछ गरम करे...
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सुशील कुमार जोशी
Almora, Uttarakhand, India
ना कविता लिखता हूँ ना कोई छंद लिखता हूँ अपने आसपास पड़े हुऎ कुछ टाट पै पैबंद लिखता हूँ ना कवि हूँ ना लेखक हूँ ना अखबार हूँ ना ही कोई समाचार हूँ जो हो घट रहा होता है मेरे आस पास हर समय उस खबर की बक बक यहाँ पर देने को तैयार हूँ ।
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