उलूक टाइम्स

"बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा " :- शौक़ बहराइची

गुरुवार, 11 सितंबर 2014

बीमार था आदतन भरे पेट रोटियों पर झपट रहा था

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कई सालों से जिसे  एक चिराग मान कर  उसके कुछ फैलाने को  रोशनी समझ रहा था  पता नहीं क्या क्या था  और क्या क्या नहीं था किस को क्या और  किस क...
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सुशील कुमार जोशी
Almora, Uttarakhand, India
ना कविता लिखता हूँ ना कोई छंद लिखता हूँ अपने आसपास पड़े हुऎ कुछ टाट पै पैबंद लिखता हूँ ना कवि हूँ ना लेखक हूँ ना अखबार हूँ ना ही कोई समाचार हूँ जो हो घट रहा होता है मेरे आस पास हर समय उस खबर की बक बक यहाँ पर देने को तैयार हूँ ।
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