रविवार, 22 अप्रैल 2012

आज छुट्टी है

रोज कुछ कहने को
जरूरी नहीं बनायेगा

भौंपू आज बिल्कुल
नहीं बजाया जायेगा

किसी पर भी उंगली
आज नहीं उठायेगा

'उलूक' आज कोई
गाना नहीं सुनायेगा

आँख बंद रखेगा
और
सीटियां बजायेगा

रविवार है
मौन रखेगा
शांति से
छुट्टी मनायेगा

'चर्चामंच' वालो से
निवेदन किया जायेगा

कोई इस बात की चर्चा
भी वहां नहीं करायेगा

'रविकर' को भी
पता नहीं चलने
दिया जायेगा
देखते हैं आज कैसे
दिल्लगी कर पायेगा

सोमवार से शनिवार
पता रहता है
कोई यहां
देखने नहीं आयेगा

रविवार को कम से कम
बेवकूफ नहीं बन पायेगा

'ऊँ शाँति ऊँ शाँति
शाँति शाँति ऊँ'
वाला कैसेट बजा के
सबको सुनाया जायेगा

एक दिन के लिये
ब्लाग 'उलूक टाईम्स'
में ताला 'हैरीसन' का
लगाया ही जायेगा।

3 टिप्‍पणियां:

  1. अलीगढ़ी ताला लगे, चाहे चुनो दिवार ।

    रविकर के परवेश हित, काफी एक दरार ।

    काफी एक दरार, लगा खिड़की दरवाजा ।

    काले परदे साज, सुनेगा गाना बाजा ।

    माना है रविवार, मगर ना करो बवाला ।

    हम है पक्के यार, तोड़कर आयें ताला ।।

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  2. हमने तो कल ही सारा काम निबटा लिया था!
    आज फिर एक से गिनना शुरू किया है।

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