शनिवार, 7 जुलाई 2012

अल्विदा भास्कर

डा0 यशवंत भास्कर जोशी, विभागाध्यक्ष, कम्प्यूटर विज्ञान विभाग, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, की असमय मृत्यू पर श्रद्धांंजलि

बूढ़ी माँ की
पथराई आँखों
के प्रश्नो को
अनुत्तरित
वहीं कहीं
छोड़ते हुए
किसी को
उठा के
ले जाना
एक रास्ते
ले जाकर
अग्नि को
समर्पित कर
के आना
वापस लौट
कर आना
खाली हाथ
फिर उसी
रास्ते से
सोचते हुऎ
समय से
पहले चल
दिया एक
साथी 'भास्कर'
मिलने शायद
खुद ही
सूर्यदेव से
विधि का
विधान है
हर किसी
के समझ
में ये
आता है
फिर भी
जाने वाला
पता नहीं
कहाँ कहाँ
किसके लिये
कितने कितने
शून्य छोड़
जाता है
और खुद
एक शून्य
होकर के
पता नहीं
किस शून्य
में विलीन
हो जाता है
ये हमें
कहां फिर
पता चल
पाता है।

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