मंगलवार, 20 अगस्त 2013

आपको रक्षाबन्धन की बधाई मुझे तो गुब्बारे की याद है आई

सोच रहा था आज
घर लौट कर
रक्षाबन्धन पर ही
थोड़ा कुछ लिख
लिया जायेगा
पर कहाँ पता था
कालेज में कोई
बात बात में
एक गुब्बारे की
याद दिलायेगा
चलिये कोई बात
नहीं आप रक्षाबन्धन
धूमधाम से मनाइये
गुब्बारा मेरे लिये
ज्यादा महत्वपूर्ण है
उससे मेरा ध्यान
ना हटवाइये
रक्षाबन्धन पर तो
बहुत से लोग
लिख ले जायेंगे
आप उन सब
को पढ़ने को
जरूर जायेंगे
पर गुब्बारे की
बात को कहना
हम तो नहीं
ही छोड़ पायेंगे
आज ही कहेंगे
और आज ही
यहाँ पर बतायेंगे
अब आप भी कहेंगे
भाई इसे आज
ऎसा क्या हो गया
ऎसा कौन सा
गुब्बारा है
जिसकी याद
आते आते ये
खुद गुब्बारा
गुब्बारा सा
हो गया
सच तो ये है
किसे पता था
भगवान बहुत
अप्रत्याशित
भी हो जायेगा
गुब्बारे की थैली
में से किसी भी
गुब्बारे को
हवा दे जायेगा
यही गुब्बारा
एक बार जो
हवा में जा के
उड़ जायेगा
फिर कहाँ लौट
के जमीन पर
वापस आ पायेगा
पर ऎसे गुब्बारे
भी तो कहीं अभी
तक नहीं पाये जाते हैं
जो हवा भरवाने के बाद
बहुत लम्बे समय तक
हवा में ही रह पाते हैं
राकेट होने लायक
हवा भरवाने की
कोशिश भी करते हैं
जोर भी इसके लिये
बहुत लगाते हैं
पर ज्यादा हवा
भर जाने से
उससे पहले ही
फूट जाते हैं
ऎसे फटे गुब्बारों को
थैली के गुब्बारे फिर
कहाँ मुँह लगाते हैं
गुब्बारे और उसमें
और हवा भर रहे
पम्पों पर मेरा
जब ध्यान गया
इस बात ने मुझे
तब बहुत ही
परेशान कर दिया
आप रक्षाबन्धन
की बहुत बहुत
बधाईयां ले लो
मुझे तो गुब्बारे
की ही बात
बस कहनी थी
कल के लिये
नहीं रुका गया
सब कुछ आज ही
आकर के कह गया ।

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