शुक्रवार, 12 जून 2015

अक्ल वालों की नजर गाय पर होती है बेवकूफ खुद ही बैल हो जाते हैं

दूध से रोज
ही नहाते हैं
दूध के धुले
भी कहलाते हैं

ऐसे
शुद्ध लोगों पर
ना जाने कैसे
आप जैसे
अशुद्ध लोग


मिलावटी होने
का इलजाम
लगा ले जाते हैं

काम तो
होते ही हैं
करने के लिये
किये भी जाते हैं

अब कौन से काम
जरूरी होते हैं
कौन से गैर जरूरी
इस बात को
काम करने वाले
ही बता पाते हैं

कुछ काम
अपने नहीं
भी होते है
पर दुधारू गाय
की तरह
पहचाने जाते हैं

कुछ काम
अपने ही
काम होते हैं
और
सींग मारने वाले
बैल माने जाते हैं

बेवकूफ लोग
सींग पकड़े
लटके नजर आते हैं

होशियार
गाय के
दूध से
रोज नहाते है
इसीलिये दूध के
धुले भी कहलाते हैं

‘उलूक’
देखता रहता है
गाय और
गाय के दूध
की धार को

उसकी
सोच में
बैलों की
सींगों के घाव

रोज
ही बनते हैं
और
रोज ही
हरे हो जाते हैं ।

चित्र साभार: www.clipartpanda.com

18 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को शनिवार, १३ जून, २०१५ की बुलेटिन - "अपना कहते मुझे हजारों में " में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद। जय हो - मंगलमय हो - हर हर महादेव।

    जवाब देंहटाएं
  2. "कुछ काम अपने नहीं भी होते है पर दुधारू गाय
    की तरह पहचाने जाते हैं " . राजनीति में अक्सर यही होता है

    सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (14-06-2015) को "बेवकूफ खुद ही बैल हो जाते हैं" {चर्चा अंक-2006} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    जवाब देंहटाएं