शुक्रवार, 5 जून 2015

सब कुछ सीधा सीधा हो हमेशा ऐसा कैसे हो

रख दे
अपना दिल
खोल कर
अपने सामने से

और पढ़ ले
हनुमान चालीसा

किसी को भी
तेरे दिल से
क्या लेना देना

सबके पास
अपना एक
दिल होता है

हाँ
हो सकता है
हनुमान जी
के नाम पर
कुछ लोग रुक जायें

ये बात
अलग है
कि हनुमान जी
किस के लिये
क्या कर सकते हैं

हो सकता है
हनुमान जी
के लिये भी
प्रश्न कठिन हो जाये

उन्हें भी
आगे कहीं
राम चंद्र जी के पास
पूछ्ने के लिये
जाना पड़ जाये

इसीलिये
हमेशा राय
दी जाती है
खबर के चक्कर में
पड़ना ठीक नहीं है

खबर
बनाने वाले
की मशीन
खबर वाले
के हाथ में
नहीं होती है

खबर
की भी एक
नब्ज होती है

एक
घड़ी होती है
जो टिक टिक
नहीं करती है

हनुमान जी ने
उस जमाने में
घड़ी देखी
भी नहीं होगी

देखी होती
तो तुलसीदास जी
की किताब में
कहीं ना कहीं
लिखी जरूर होती

इसलिये
ठंड रख
गरम मत हो
खा पी और सो

खबर को
अखबार
में रहने दे

अपने
दिल को उठा
और वापिस
दिल की जगह में
फिर से बो
हनुमान जी
की भी जय हो
जय हो जय हो ।

चित्र साभार: beritapost.info

8 टिप्‍पणियां:

  1. जय हो हनुमान जी की

    यहाँ भी पधारें
    http://chlachitra.blogspot.in/
    http://cricketluverr.blogspot.com

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (07-06-2015) को "गंगा के लिए अब कोई भगीरथ नहीं" (चर्चा अंक-1999) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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