शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

अभी अभी पैदा हुआ है बहुत जरुरी है बच्चा दिखाना जरूरी है





जब भी तू
समझाने की कोशिश करता है
दो और दो चार
कोई भाव नहीं देता है
सब ही कह देते हैं दूर से ही नमस्कार

जमाने की नब्ज में बैठ कर जिस दिन
शुरु करता है तू
शब्दों के साथ व्यभिचार
जयजयकार गूँजती है चारों ओर
और समझ में आना शुरु होता है
उसी क्षण से व्यवहार।

'सरगोशीयों के स्वर' में मुद्रित24  पृ65 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें