रविवार, 18 जून 2023

समझ में आना बंद हो गया



बकबकाना बंद हो गया
इधर से छोड़ उधर से आना जाना बंद हो गया
किताब अपनी खुद की दिखती नहीं हाथ में
कलम कान के पीछे लगाना बंद हो गया

बड़बड़ाना बंद हो गया
माथे में सलवटें बनती नहीं हैं
हवा में यूं ही हाथ हिलाना बंद हो गया

कहना सुनाना बंद हो गया
लिखना लिखाना बंद हो गया
जोर लगा कर हैइशा कोई फ़ायदा नहीं
कुछ भी सोच में आना बंद हो गया

हड़बड़ाना बंद हो गया सकपकाना बंद हो गया
सुकून शब्दकोष में सो गया
नीद बेहोशी सी हो गयी
सपनों का आना बंद हो गया

फड़फड़ाना बंद हो गया
हवा हवा हो गयी पानी पानी हो गया
आईने में चेहरा नजर आना बंद हो गया

महकना महकाना बंद हो गया
रेत फ़ैलाने लगा शहर दर शहर
रेगिस्तान का ठिकाना बंद हो गया

चहचहाना बंद हो गया
उल्लुओं का रेला बढ़ता चला गया
कौन किस से मिले कारवाँ कैसे बने
मिलना मिलाना बंद हो गया

दिमाग बंद कर खुद का
पकाने लगा खुद खुदा और उसकी भीड़ का सिपाही
‘उलूक’ का पकाना बंद हो गया |

चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/



17 टिप्‍पणियां:

  1. चहचहाना बंद हो गया
    उल्लुओं का रेला बढ़ता चला गया
    कौन किस से मिले कारवाँ कैसे बने
    मिलना मिलाना बंद हो गया
    बेहतरीन
    सादर नमन

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  2. इस रचना को देखकर विश्वास है कि ना तो कुछ बन्द हुआ है और ना कुछ बन्द हो सकता है

    रोचक रचना

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  3. साहिब ! 🙏
    नमन संग आभार आपका जो आपने अपनी उपर्युक्त रचना के शीर्ष पर कहीं उल्लेख किया, कि - "Subodh Sinha जी अब आपके विच्छेदन के लिए 😂" .. आगे आपकी "स्वच्छंद" (साहिब ! आपके अनुसार, आप तो छंद लिखते नहीं है .. शायद ...) के शीर्षक और मज़ेदार "स्वच्छंद" की पंक्तियाँ .. अब अपनी पंक्तियों के साथ-साथ मेल कर के मेरी बतकही सुनने (पढ़ने) की भी कृपा करें .. ताउम्र आपका आभारी रहूँगा ..😂😂😂 ..बस यूँ ही ...

    समझ में आना शुरू हो गया
    >>>>>>><<<<<<<

    धर्मयुद्ध छिड़ी हुई, सब मुल्ला, पंडित बकबका रहे,
    उधर से ही तो ड्रोन, कभी आतंकवादी, आना बन्द ना हुआ
    किताब ही किताब दिखती हैं मदरसों और हनुमान मंदिरों में
    कलम रहे कैसे, कान पर तो चश्मे का 'फ्रेम' है टिका हुआ

    सलवटें और हाथ हिलाना दिखता तो है एक ही जगह
    साहिब ! शायद आपने " 'O'वैसी " को देखा-सुना नहीं
    आपके चश्मे के शीशे का 'नम्बर' शायद बदल गया 🤔

    रोज तो "मुखपुस्तिका बाला" के कहने पे
    सबको अपनी सोचों को थोप कर हैं आप परेशान करते
    अब ये भी क्या तराने झूठे छेड़ दिए साहिब आपने
    भावी नेता जी बनने वाले हैं क्या 🤔

    सपनों का ना आना, आईने में चेहरे ना दिखना
    ये सब संकेत हैं आँख पुनः 'चेक' कराने के
    अब तो पक्का है कि आपके शीशे का 'नम्बर' बदल गया 😧
    "फॉग" वाली 'डिओ' आपने लगाना शायद बंद कर दिया
    या शायद पड़ोसन की गैस वाली बीमारी ठीक हो गयी।
    और ये बात पुरानी हो चली, जब से भर-भर ट्रेक्टर निकल
    नदियों से रेत निकल कर आपका आशियाना था बन रहा

    चहकना तो जारी है पर अभी भी आपका साहिब
    रुख़ किजिए मयखाने का जब कभी भी
    मिलना-मिलाना बदस्तूर जारी है वहाँ
    सिलेंडर भरी गैस की मुफ़्त उन्हें तो मिल रही
    जहाँ नहीं पकता था, वहाँ भी खाना अब पक रहा
    भला ऐसे में 'उलूकवा' का क्या पकना बंद हो गया 🤔🤔🤔
    ( 😅😂😁😀😃🙊🙉🙈🙏🙏🙏🤗🤗🤗)


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  4. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार २० जून २०२३ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  5. तुम सब 'आदिपुरुष' देखो. तुम्हारी आँखें खुल जाएंगी, तुम्हारे कान खुले के खुले रह जाएंगे और तुम्हारे मुख से - 'जय ओम राउत' और - 'जय मनोज मुन्तशिर शर्मा' का जाप होने लगेगा.

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  6. हड़बड़ाना बंद हो गया सकपकाना बंद हो गया
    सुकून शब्दकोष में सो गया
    नीद बेहोशी सी हो गयी
    सपनों का आना बंद हो गया
    शायद कुछ ऐसा देख सुन लिया है या जान लिया है उलूक ने कि उपरोक्त लक्षण दिखने लगे हैं, किंतु काल बहुत बलशाली है, एक दिन फिर सब कुछ शुरू हो जाएगा

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  7. 'उलूक का पकाना बंद हो गया'
    अरे ऐसा गज़ब मत करो. उलूक अगर पकाएगा नहीं तो हम खाएंगे क्या?

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  8. कलम,सोच,आईना, सपने,बड़बड़ाहट,रेगिस्तान होती दुनिया से मिलाने के लिए उलूक का बोलना कभी बंद न हो।
    अनोखी शैली में गहन अभिव्यक्ति सर।
    प्रणाम
    सादर।

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  9. कहना सुनाना बंद हो गया
    लिखना लिखाना बंद हो गया
    जोर लगा कर हैइशा कोई फ़ायदा नहीं
    कुछ भी सोच में आना बंद हो गया
    सोच ही संकीर्ण हो गयी तो जोर लगाने की जरूरत ही कहाँ...
    बस बने बनाए को बिगाड़ने की सोच
    चल रही ।
    गहन अभिव्यक्ति ।

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  10. सब कुछ बन्द हो पर बडबडाना नहीं ... साँसों का होना प्रमाण इसी से ही होता है ...

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