गुरुवार, 12 जुलाई 2012

तितली उड़ तोता उड़ कौआ उड़ पेड़ उड़

तितली उड़ तोता उड़ कौआ उड़
कहते कहते बीच में 
पेड़ उड़ कह जाना

सामने वाले के पेड़ उड़ कहते ही 
तालियाँ बजाना

बेवकूफ बन गया 
पेड़ उड़ कह गया
सोच सोच के बहुत खुश हो जाना

ऎसे ही 
बचपन के खेल और तमाशों का
धीरे धीरे धुंधला पड़ते चले जाना

समय की बलिहारी
कोहरे का धीरे धीरे हटते चले जाना

गुणा भाग करते करते
उम्र निकाल ले जाना
पेड़ नहीं उड़ता है सबको समझाना

परीक्षा करवाना परीक्षाफल का आना

पेड़ उड़ कहने वालों का
बहुत ज्यादा अंको से पास हो जाना 

तितली तोते कौऎ उड़ कहने वालों का
ढेर हो जाना

लोक और उनके तंत्र का 
उदाहरण सहित समझ में आ जाना ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. तोता चिड़िया जा छिपे, निकलेंगे अब भोर।
    पाकर के अंधियार को, उल्लू करते शोर।।

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  2. तितली उड़ कौआ उड़ा, उल्लू उड़ा बताय |
    आज उड़ाते पेड़ भी, धरा सफा हो जाय |
    धरा सफा हो जाय, पेड़ पर नंबर ज्यादा |
    पक्षी सारे आज, बदलने लगे इरादा |
    वैसे उड़ते लोग, उड़ाते बाप कमाई |
    बच्चों का यह खेल, बड़ी बेईमानी लाई ||

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  3. आपकी प्रस्तुति का असर ।

    बनी है शुक्रवार की खबर ।

    उत्कृष्ट प्रस्तुति चर्चा मंच पर ।।

    आइये-

    सादर ।।

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  4. बहुत ही सामायिक और सच्ची पंक्तिया हैं ...वाकई पेड उड़ गए ..दुखद हैं ...अब नए वृक्ष वापस लगा कर पेड उड़ करने के लिए भी बरसो चाहिए

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  5. वाह!सराहनीय सृजन सर।
    यही भाव मेरे मन में काफ़ी बार उमड़ते रहते है।
    सादर

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