मंगलवार, 17 अगस्त 2021

बहुत हैं लाशें समाज में बैठी हुई हर शय पर डरना नहीं है याद रखना है दो चार जिंदो का कलाम लिखा

 

                                                                                       

बहुत लिखा है कहते हैं लोग
खुद पता नहीं है क्या और कितना लिखा
लिखने पर आ गई बात
इतना ही पता है रोज का रोज कुछ आ लिखा

क्या लिखा है पता होता काश
होश में लिखा होता अगर कभी कुछ यहाँ आ कर
जब भी लिखा
लिखने के बाद लगा हमेशा
लिखने का बस
जनाजा लिखा

बहुत गजब का लिखते हैं लोग
खुद धनुष होते हैं तीर लिखते ही नहीं
खबर लिखने की फैलाते हैं उनके लिखे का
बिना देखे
जिंदा लिखा या मरा लिखा

लिखना किसी का किसी बात पर
बहुत ही जरूरी है
बस इसलिये
कि होना कुछ नहीं होता है मरे हुऐ से
किसी ने अगर लिख भी दिया
उसने कुछ जिंदा लिखा

कुछ नहीं होता है पढ़कर उस लिखे पर
जो होता है खुद का किया हमेशा
लिखने वाले रोज मरते हैं रोज जीते हैं
लिखना लिखाना तू कर और बता
तूने तो खुदा लिखा

‘उलूक’ लाशें कफन में लिपटी हुए एक चीज होती है
क्यों सोचना
चलते हुऐ बहुत से लोग भी
लाशें होने की महारत रखते हैं
डरना नहीं
याद रखना कुछ चेहरे अपनी सोच में अपने आस पास के
उनकी दुआओं के ताबीज की ढाल में देखना
तेरे लिये सलाम लिखा ।

चित्र साभार: https://www.pngfind.com/

17 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 18 अगस्त 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. अपनी त्रुटि..
    चित्र लगाना भूल गई
    क्षमा..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 19-08-2021को चर्चा – 4,161 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

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  4. क्या बात है... लिखने का जनाजा लिखा ... कमाल! बेमिसाल! लाजवाब!

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  5. गजब!
    चलते हुए लोग भी लाशें...
    जिंदा दिखते तो हैं कि सांसें चल रही है ,
    वर्ना हमें गुजरे जमाना गुजर गया ।
    लाजवाब सृजन।

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  6. हर बार की तरह व्यंग में लिपटी छटपटाहट ...

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  7. उलूक’ लाशें कफन में लिपटी हुए एक चीज होती है
    क्यों सोचना
    चलते हुऐ बहुत से लोग भी
    लाशें होने की महारत रखते हैं
    डरना नहीं
    याद रखना कुछ चेहरे अपनी सोच में अपने आस पास के
    उनकी दुआओं के ताबीज की ढाल में देखना
    तेरे लिये सलाम लिखा ।

    क्या बात! अद्भुत।

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  8. उलूक’ लाशें कफन में लिपटी हुए एक चीज होती है
    क्यों सोचना
    चलते हुऐ बहुत से लोग भी
    लाशें होने की महारत रखते हैं
    वाह!!!
    एकदम सटीक लाशें ही होते हैं कुछ लोग जिनमें संवेदना नहीं...
    बहुत लाजवाब।

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