मंगलवार, 21 अगस्त 2012

ज्योतिष हो गया अखबार

जन्म पत्री बाँचते हैं
बहुत ही ज्ञानी हैं
पंडित जी का
नहीं कोई सानी है
हर साल आते हैं
मेरे घर पर दो बार
माँगते हैं जन्म पत्री
सबकी हर बार
बताते हैं कुछ भूत
और कुछ भविष्य
वैसे का वैसा ही
जैसा बता गये थे
पिछली बार
आये कल भी
उसी तरह इस बार
पोथी निकाल कर
बैठे महानुभाव
शुरू किया बाँचना
हमेशा की तरह
नक्षत्रों को
सुनाने लगे
वही पुरानी रामायण
सुनते ही पुरानी कथा
जब नहीं रहा गया
पंडित जी से मैने
तब कह ही दिया
गुरू कुछ नई बात भी
कभी कभी बताया करो
जन्मपत्री से भी अगर
कुछ खोद नहीं
पा रहे हो तो
कम से से कम
अखबार तो पढ़ कर
के आया करो
आजकल तो जो
होना है आगे वो
पहले अखबार में
ही आता है
उसके बाद ही
होना है जो तभी
तो हो पाता है
मजे की बात
इसमें ये है
कि  ग्रह नक्षत्र
को भी पता नहीं
चल पाता है
कि अखबार
वालों को
ये सब कौन जा
के बताता है
इसीलिये तो
जो वाकई में
हो रहा है वो
अखबार में
कम ही
जगह पाता है
अखबार से
बढ़िया जन्मपत्री
पंडित अब तू भी
नहीं बाँच पाता है ।

12 टिप्‍पणियां:

  1. जन्म-पत्री बांचते बाबाओं की खूब पोल खोली है आपने।

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  2. gar talkh sacchayeeya benkab hoti rahegi,dekhiyega ek din suhani bhor aayegi zaroor,swal kundli bachne vale ka hi nahi hai,sawal yah bhi hai ki mere jaise kitne log ese aur prajwlit karte ja rhe hai akhirkar en pandito ke darvajo par mere jaise log hi dastak dete hai,

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  3. अख़बारों की खबर यह, आखर आखर अखर ।

    बारो फूंको फाड़ दो, छपती अब न प्रखर ।

    छपती अब न प्रखर, लीक पर चलता जाए ।

    प्रश्नपत्र हो लीक, नहीं विज्ञापन भाये ।

    मनमोहन का चित्र, हाथ जोड़े जन पथ पर ।

    अन्ना बाबा मित्र, रखाते छत पर छप्पर ।।

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  4. किन्तु पंडित जी इमानदार है , भला है जो महंगाई नहीं मारी है ....

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  5. ये भी रोजी रोटी का एक सहारा है .. क्या करे बेचारे..

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  6. उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ... आभार

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  7. सुशील जी, आपने काफी धारदार व्‍यंग्‍य का इस्‍तेमाल किया है। इस हेतु बधाई स्‍वीकारें।


    तस्‍लीम और साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन ब्‍लॉग के नहीं खुलने सम्‍बंधी समस्‍या की ओर ध्‍यान दिलाने के लिए आभार। इसके लिए हमें खेद है। हम इस समस्‍या की जड़ तक पहुंचने का प्रयास जारी है।

    अभी तक परीक्षण से यह पता चला है कि आमतौर से जहां पर एंटीवायरस के फ्री वर्जन इस्‍तेमाल हो रहे हैं, उन्‍हीं कम्‍प्‍यूटर्स में से कुछ पर मोजिला और क्रोम ब्राउजर पर यह समस्‍या आ रही है। फिर भी हम इसे दूर करने का प्रयत्‍न कर रहे हैं।

    जब तक यह समस्‍या बनी हुई है कि आप इन ब्‍लॉगों के मोबाइल वर्जन (तस्‍लीम मोबाइल वर्जन, साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन मोबाइल वर्जन) को पढ़ने के लिए इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ किसी भी यूअरएल के आगे "?m=1' जोड़ना होता है।

    उदाहरणार्थ 'तस्‍लीम' का मोबाइल वर्जन का पता 'http://ts.samwaad.com/?m=1' और 'साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन' 'http://sb.samwaad.com/?m=1' का पता होगा।

    मोबाइल वर्जन कम्‍प्‍यूटर पर भी खुल जाता है। इसमें जावास्क्रिप्‍टस वगैरह लोड नहीं होतीं, इसलिए यह जल्‍दी भी खुल जाता है।

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  8. अखबार ,जन्म पत्री और पार्टी प्रवक्ता सब जानतें हैं उडती चिड़ियाँ पहचानतें हैं ,एक मढ़ता है आरोप ,दूसरा राहुकेतु ,असली भविष्य कथन कहे तीसरा ,दिग्विजय कहलाये भाई साहब उलूक टाइम्स पे व्यंग्य बाण प्रखर हो रहें हैं बेहद मुखर हो रहें हैं एक तीर से कई शिकार ,इसको मार चाहे उसको मार .कृपया यहाँ भी पधारें -
    Neck Pain And The Chiropractic Lifestyle
    Neck Pain And The Chiropractic Lifestyle

    Reducing symptoms -correcting the cause.

    गर्दन में दर्द होने पर अमूमन आप दवाओं की शरण में चले आतें हैं लेतें हैं आप एस्पिरिन ,तरह तरह के अन्य दर्द नाशी ,विशेष पैन पिल्स ,इस दर्द के लक्षणों के शमन के लिए लेतें हैं आप मसल रिलेक्सर्स ,मालिश ,हॉट पेक्स .

    लेकिन गर्दन में दर्द की वजह न तो एस्पिरिन की कमी बनती और न अन्य दवाओं की .

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  9. वाह साहब आपने तो कमाल कर दिया एक ही व्यंग बाण से कई को हलाल कर दिया !!

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  10. जन्मपत्री से भी अगर
    कुछ खोद नहीं
    पा रहे हो तो
    कम से से कम
    अखबार तो पढ़ कर
    के आया करो ...

    उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ... आभार.

    जवाब देंहटाएं