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बुधवार, 27 दिसंबर 2017

‘उलूक’ की 2017 की सौवीं बकवास गालिब के नाम : अच्छा हुआ गालिब उस जमाने में हुआ और कोई गालिब हुआ

दो सौ के
ऊपर से
और बीस
बीत गये साल
कोई दूसरा
नहीं गालिब हुआ

अब तो समझा
भी दे गालिब
गालिब हुआ भी तो
कोई कैसे गालिब हुआ

बहुत शौक है
दीवानों को
गालिब हो जाने
का आज भी
जैसे आज ही
गालिब हुआ

लगता है
कभी तो हुआ
कुछ देर को
ये भी
गालिब हुआ
और वो भी
गालिब हुआ

समझ में
किसे आता है
पता भी
कहाँ होता है
अन्दाजे गालिब
हुआ तो क्या हुआ

बयाने गालिब
पढ़ लिया बस
उसी समय से
सारा सब कुछ
ही गालिब हुआ

ये हुआ गालिब
कुछ नहीं हुआ
फिर भी इस साल
का ये सौवाँ हुआ

तेरे जन्मदिन
के दिन भी कोई
नयी बात नहीं हुई
वही कुछ रोज का
धुआँ धुआँ हुआ

अब तो एक ही
गालिब रह गया है
जमाने में गालिब
कुछ भी कहना
उसी का
शेरे गालिब हुआ

‘उलूक’ की नीयत
ठीक नहीं हैं गालिब
क्या हुआ अगर कोई
इतना भी गालिब हुआ ।

चित्र साभार: http://youthopia.in/irshaad-ghalib/


 गालिब का मतलब : सं-पु.] - उर्दू के एक प्रख्यात कवि (शायर) का उपनाम। [वि.] 1. विजयी 2. प्रबल 3. ज़बरदस्त; बलवान 4. जिसकी संभावना हो; संभावित 5. 
दूसरों को दबाने या दमन करने वाला

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

क्या करे कोई गालिब खयाल वो नहीं हैं अब

होते होंगे कुछ कहीं
इस तरह के खयाल
तेरे पास जरूर गालिब
दिल बहल जाता होगा
बहुत ही आसानी से
उन दिनो तेरे जमाने में
अब ना वो दिल
कहीं नजर आता है
ना ही कोई खयाल
सोच में उतरता है कभी
ना ही किसी गालिब की
बात कहीं दूर बहुत दूर
तक सुनाई देती है
ठंडे खून के दौरों से
कहाँ महसूस हो पाती है
कोई गरमाहट
किसी तरह की
चेहरे चेहरे में पुती
हुई नजदीकियां
उथले पानी की गहराई
सी दिखती है जगह जगह
मिलने जुलने उठने बैठने
के तरीकों की नहीं है
कोई कमी कहीं पर भी
वो होती ही नहीं है
कहीं पर भी बस
बहुत दूर से आई
हुई ही दिखती है
जब भी होता है कुछ
लिख देना सोच कर कुछ
तेरे लफ्जों में उतर कर
बारिश ही बारिश होती है
बस आँख ही से नमी
कुछ दूर हो आई सी
लगती है अजनबी सी
कैसे सम्भाले कोई
दिल को अपने
खयाल बहलाने के
नहीं होते हों जहाँ
जब भी सोचो तो
बाढ़ आई हुई सी
लगती है गालिब ।

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