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शनिवार, 24 अगस्त 2013

सुबह सुबह ताजी ताजी गरम गरम

विधायक जी ने 
जिलाधिकारी जी को
रात को बारा बजे
जब दूरभाष लगाया

लड़खड़ाती
आवाज से उनकी
उन्हे आभास हो आया

पक्का ही
डी एम ने
पव्वा है लगाया

विधायक जी ने
तुरंत ही
इस घटना को
आयुक्त को
जब बताया

आयुक्त ने भी
पुष्टि करने को
डी एम
साहब को
फोन लगाया

भाई
तुम्हारी
आवाज तो
लड़खड़ा रही है

तुमने
पी हुई है
ऎसा कुछ
बता रही है

डी एम
साहब को
बहुत जोर
का गुस्सा
आना ही था
वो आया

थोड़ी सी
तो पी है
चोरी तो
नहीं की है

जो बनता है
बना डालो
मेडिकल
चाहो तो
वो भी
करवालो

ये सब
मुझे ही
किसी ने
नहीं है
बताया

मेरे घर में
जितने
अखबार
आते हैं

उनमें से
एक के
मुख्य पृष्ठ
पर मैं इसे
पढ़ पाया

तब से
कुछ भी
समझ में
नहीं आ
रहा है

इस समाचार का
विश्लेषण दिमाग
नहीं कर पा रहा है

वैसे खाली फोन में
आवाज से कोई कैसे
पकड़ा जाता है

हर अधिकारी
के घर में
सी सी टी वी
क्यों नहीं
लगाया जाता है

खुश्बू का भी पता
चल जाया करे
क्या ऎसा कोई
इंस्ट्रूमेंट बाजार में
नहीं आता है

शुरुआत तो
विधायक
निवास से ही
की जानी चाहिये

तस्वीर जनता तक
भी तो जानी चाहिये

खाली पड़ी
विधायक
हास्टल के
पीछे की
गली की
बोतलें भी
किसी ने
एक बार
ऎसी ही
अखबार में
छपवा दी थी

बताया गया था
विरोधी दल
के नेता ने
कबाड़ी से
खरीद कर
रखवा दी थी

फोटो खिंचवा के
अखबार के दफ्तर
को भिजवा दी थी

पता नहीं कुछ भी
समझ में नहीं
आ पा रहा है

शराब को
आखिर
इतना बदनाम
क्यों किया
जा रहा है

मुम्बई में हुआ है
फिर से गैंग रेप
पर
शराब की
खबर को
उससे भी
हाई
टी आर पी
का बताया
जा रहा है

आभारी रहूँगा
अगर आप में
से कोई
मुझे समझा देगा

इस समाचार में
अखबार वाला
क्या हमको
बताना चाह रहा है ।

शुक्रवार, 29 जून 2012

सरकारी राय

शहर का एक इलाका
सड़क में पड़ी पचास
मीटर लम्बी दरार
लपेट में आये कुछ
लोगों के घर चार
जिलाधिकारी आया
साथ में सत्ता पक्ष
के विधायक को लाया
मौका मुआयना हुआ
नीचे खुदा हुआ बहुत
बड़ा एक पहाड़
सबको सामने दिखा
कुछ दिन पहले सुना
बड़ी बड़ी मशीने
रात को आई
रात भर आवाजे कर
सुबह को पता नहीं
किसने कहाँ पहुँचाई
किसने खोदा सबके मुँह
तक नाम आ रहा था
गले तक आकर पीछे
को चला जा रहा था
इसी लिये कोई
कुछ भी बताने
में इच्छुक नजर
बिल्कुल भी नहीं
आ रहा था
जिलाधिकारी अपने
मातहतों के उपर
गुस्सा बरसा रहा था
अखबार में अखबार
वाला भी खबर
छपवा रहा था
नाम पर किसी का
नहीं कहीं भी
कोई आ रहा था
हर कोई कोई है
करके सबको
बता रहा था
सरकारी अमला
घरवालों के घरों
को तुरंत खाली
करवा रहा था
साथ में मुफ्त में
समझाये भी
जा रहा था
जब देख रहे थे
पहाड़ नीचे को
जा रहा था
तो किस बेवकूफ
के कहने पर तू यहाँ
घर बना रहा था
खोदने वाले को कुछ
नहीं कोई कर पायेगा
भलाई तेरी इसी में
दिख रही है अगर
तू बिना कुछ कहे
कहीं को भाग जायेगा
इसके बाद भूल कर भी
जिंदगी में कही पर
घर बनाने की गलती
दुबारा नहीं दोहरायेगा।

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