घर के राम कृष्ण हनुमान को साथ ले
सड़क कोई एक नापने निकल जाता है
सड़क कोई एक नापने निकल जाता है
अल्बर्ट पिन्टो गुस्सा भूल जाता है
लीला देख कर कल्कियों की भुनभुनाता है
लीला देख कर कल्कियों की भुनभुनाता है
समझने में गलतियाँ करता है अनेकों एक साथ
सीधे रास्ते में ही उलझ जाता है
सीधे रास्ते में ही उलझ जाता है
दिखाने को बनाए चित्र अपने रंगों से भरे
अंधे साथ रखता है उन्हें मनाता है
अंधे साथ रखता है उन्हें मनाता है
सुनाने को कहानियां देखी हुई खुद की
बहरों को सुबहो शाम आवाजें लगाता है
बहरों को सुबहो शाम आवाजें लगाता है
लूले गाते हैं गीत लिखे भक्ति भाव से उसके
यही आगास नई रागों की धुन बनाता है
यही आगास नई रागों की धुन बनाता है
भरम होते हैं टूट कर गिरते भी हैं पता नहीं
बेखयाली उन्हें फिर से चुन उठाता है
बेखयाली उन्हें फिर से चुन उठाता है
‘उलूक’ खुद समझता है समझ गया है खुद का लिखा
फिर से समझाने को चला आता है |
फिर से समझाने को चला आता है |
चित्र साभार : https://www.wallpaperflare.com/
