चोरी डकैती हत्या बलात्कार भ्रष्टाचार व्यभिचार
कौन सा आज का है एक नया समाचार
इतिहास में भी होता आया हो जो कई कई बार
उसका किसलिए जिक्र करना बार बार
चोर घर का हो अपना हो
किसलिए उसपर बात करना
किसलिए बैठाया है हर थाने में एक थानेदार
चोर चोर चिल्लाए जो चोर के सामने सामने
उसका श्राद्ध बहुत जरूरी हो गया है करना इस बार
खुद गुनाह करे और करे इबादत भी वही गुनहगार
सबसे अच्छा है वही आज का उत्कृष्ट कारोबार
क्या जरूरत वकील की क्या अदालत की
सजा देने को हर खजूर बैठा है जब कलम ले तैयार
किसी को कुछ नहीं आता है समझ में
दिमाग रखता है बस एक हजूर का ठेकेदार
सारी निविदाएं होती हैं उसकी
उसी को लिखनी होती है खबर उसी का होता है अखबार
‘उलूक’ समझ को ठोक लिया कर अपनी हथौड़े से
कुछ भी पढ़ने से पहले हर बार
भगवान जब लिख रहा हो कुछ
बिना पढे ही लिख क्यों नहीं देता
दंडवत प्रणाम और नमस्कार ?
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