कुछ आसमान पर लिख दो
कुछ सड़क पर पड़े बेकार के सामान पर लिख दो
कुछ घर पर आए मेहमान पर लिख दो
कुछ खुदा पर कुछ भगवान पर लिख दो
कहीं भी कुछ नहीं हिलेगा
आने वाले बहुत बड़े तूफान पर कुछ लिख दो
पूंछ मोटी होना शुरू होगई बाल खड़े हो जाएंगे
साहिब के साहिबान पर लिख दो
शर्म नहीं आएगी जरा भी
बलात्कार की खबर सुबह से लेकर शाम लिख दो
किसी हजूर को बना भी दिया जाएगा हजूरे आला
क्या उखाड़ लोगे आला कमान लिख दो
दिखता नहीं है न सुनाई देता है
सब फजूल है फर्जी है
अपने हिसाब का नहीं है फरमान लिख दो
पती पत्नी की लड़ाई है क्या हुआ अगर सरकार में है
करोड़ों का हिसाब है जनता के नाम लिख दो
हम भी सुलझा लेंगे हमारे लिए लिखने वाले भी
अपने अपने चिट्ठे में छपा लेंगे डरो मत बेलगाम लिख दो
शर्म करें सवाल पूछने वाले
उनके लिए हैं हमारे पास बने बनाए जवाब
कत्लेआम बबाल लिख दो
‘उलूक’ कहते हैं तेरे ही दोस्त तुझसे
तुझे अक्ल नहीं है
किसलिए बोलता है बेलगाम
हजूरों के खिलाफ
कुछ सोचता भी नहीं है
कुछ नहीं करने वाले कहीं भी
कुछ करदेने का सब कुछ
तेरे नाम लिख देंगे
किसलिए रट लगाए है बैठा है
ये भी लिख दो और वो भी लिख दो
चित्र साभार: https://medium.com/
