http://blogsiteslist.com

गुरुवार, 17 जनवरी 2019

सेब को अनार है कह देने वालों की भर्ती गिरोह का सरदार करवा रहा है

गिरोह

पर्दे के
पीछे से

जल्दी ही

कुछ उल्टा
करने
जा रहा है

सामने से
हो रही

अच्छी 

सीधी
बातों से

समझ
आ रहा है

अखबार

सरदार की
भेजी खबर को 


सजा कर
दिखा रहा है

जरूरत मंदों
के लिये

संवेदना
देख कर

सब गीला
हो जा रहा है

शहर में
कुछ नया
अजूबा होने
के आसार

मौसम विभाग
सुना रहा है

आंकड़े
बगल के देश
के मेलों में बिके

गधों के
ला ला कर
दिखा रहा है

जमीने
किस की
खरीदी हुई हैं

किस के
हैं मकान
मैदान के
शहर में

जायजा
लिया
जा रहा है

पहाड़
से उतार
मैदान में

राजा के
दरबार को
ले जाने का

आदेश
जल्दी ही
आने जा रहा है

पहाड़ों
को वीरान
करने की
एक नयी
कोशिश है

किसी
को बहुत
मजा
आ रहा है

गिरोह
पढ़ा रहा है 


सेब को
अनार
कहलवाना
किसी को 

कोई
‘उलूक’ को

अनार है
अनार है
कह कर

एक सेब
रोज
दिखा रहा है । 


चित्र साभार: www.kisspng.com

मंगलवार, 15 जनवरी 2019

इस घर को उस घर से निकाल किसी और घर में मिलाने का जल्दी ही कमाल होगा

दैनिक हिन्दुस्तान 15/01/2019
नये साल

जरूर

फिर से
कोई
बबाल होगा

बिकेगा
एक बार और
बिका घर

अलग
धमाल होगा

उस घर से
उठाया था
घर कभी

सोचे बिना
कोई
सवाल होगा

इस घर में
मिलाया था
सोच कर

कल सब
अपना ही
माल होगा

घर बेच
कर बना
घर का
मालिक

कितना
निहाल होगा

कफन
तीसरे साल
बदल
देने वाला

कितना
खुशहाल होगा

पाँच साल में
निकलेगा
फिर जनाजा

क्या
सूरते
हाल होगा

किसका मरा
कुछ नहीं होगा

सबसे आगे
सिर मुँडाया

वही
माई का
लाल होगा

बेवकूफ
‘उलूक’
दौड़ेगा

छोड़ कर
चलना
घुटनों के बल

देखना
बेमिसाल होगा

समझदारों
के गिरोह में
खिल उठेंगे
चेहरे सभी

इस
नये साल
पक्का

बेवकूफों का
फिर
इन्तकाल होगा।
 

चित्र साभार: दैनिक हिंदुस्तान, मंगलवार, 15/01/2019 पृष्ठ 11

रविवार, 13 जनवरी 2019

चिट्ठाकारी और दस साल

ना
खबर पर
कुछ लिखना है

ना
अखबार पर
कुछ कहना है

सोच बैठा
एक दिन

लिखना
लिखाना ही
बन्द हो गया

दस साल
से करते हुऐ
बकवास
पर बकवास

समझ बैठा
सब तो लिख
दिया होगा

सोचना ही
सोच पर ही
एक बड़ा
पैबन्द हो गया

हर दूसरे
के चाहने
और
उसके साथ
हाथ आकर
बटाने
उसके
हिसाब से

अपना
सारा हिसाब
एक किताबी
खण्ड हो गया

कुछ
लिखना लिखाना
पन्ने पर अपने

बस इक
नुमाईश जैसा कुछ

अपनी सोच से
आती खुद की ही
सुगन्ध हो गया

पता है
कुछ नहीं
होना है इस
लिखने लिखाने से

और यूँ ही
दस साल से
लिखा लिखाया

खुद ही
झण्ड हो गया

अखबार
में खबर
और
खबर में
अखबार

सच गाँधी
नहीं रह गया
गाँधी खुद
एक इतिहास

और इतिहास
शुंड भिशुंड हो गया

गली मोहल्ले
शहर जिले
प्रदेश से
बाहर कहीं

‘उलूक’
कौन
जानता है तुझे

एक
अपने का
कहा ही
एक सदी का
कमेंट हो गया

नमन

‘अविनाश जी वाचस्पति’ 

झाड़ पर
चढ़ाया गया
‘उलूक’

आज

देख लो आकर
निगरगण्ड हो गया ।

****************


निगरगण्ड = मनमौजी, आवारा, (आँचलिक शब्द) शुंड भिशुंड= राक्षस (राक्षसी माया से तात्पर्य है)

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

जरूरी नहीं है लिखा जाये हमेशा काँव काँव

तीन अक्षर

शब्द
शिशिर

दिशाहीन
की
कोशिश

लिखने की

दिशायें
धवल उज्जवल

प्रयास

लिखे में
दिखाने की

कड़ाके की ठण्ड

सिकुड़ती सोच

शब्द
वाक्यों पर
बनाता हुआ
एक बोझ

कम होता
शब्दों
का तापमान

दिखती
कण कण
में सोच

ओढ़े
सुनहली ओस

वसुन्धरा
अम्बर
होते
एकाकार

आदमी
के मौसम
होने की

जैसे हो
उन्हें दरकार

लिये हुऐ
सूर्य
की तरह

अमृत
बरसाने
की चाहत

सभी
पूर्वाग्रह
छोड़ कर

लिखने
लिखाने
को कुछ
दे कर
राहत

प्रकृति
के नियम
से बंधे

मौसम के
गुनगुने भाव

बर्फीले
शब्द के
साथ देते

शब्द ही

अहसास

जलते हुऐ
कुछ
मीठे अलाव

‘उलूक’
कोई नहीं

होता है

कभी
धारा के साथ

कभी
धारा के विपरीत

चलाता चल

अपनी

बिना
चप्पुओं की

खचड़ा सी नाव ।

चित्र साभार: https://www.gograph.com

गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

गुलाम के इशारे पर चलता है स्वतंत्रता पढ़ाने को चला आता है

स्वतंत्र
एक शब्द है

स्वतंत्रता
एक ख्वाब है

गुलाम
और
गुलामी

आम है
और खास है

नकारते रहिये

हो 

गये तो
सीढ़ी
आपके पास है

नहीं
हो पाये 

अगर
का मतलब
साँप
कहीं ना कहीं है
और
बहुत नजदीक है
और
आसपास है

साँप
और सीढ़ी
के बीच
एक रिश्ता है
इसीलिये
खेला भी जाता है

हर गुलाम
अपने नीचे
बस गुलाम
देखना चाहता है
गुलाम सोचना
चाहता है

हर गुलाम
एक बड़े
गुलाम का
खास होना
चाहता है

गुलाम
गुलाम होकर भी
गुलाम हूँ
सोचना भी
नहीं चाहता है

गुलामी
खून में होती है

खून
लाल होता है
सभी का
एक जैसा
आदमी से लेकर
जानवर का तक

सारे गुलाम
स्वतंत्रता जीते हैं
ख्वाब पीते हैं

इसके
गुलाम
उसको
स्वतंत्रता
पढ़ाते हैं

उसके
गुलाम
स्वतंत्रता
सिखाने वाले
शिक्षकों की
पाँत में
सबसे
आगे खड़े
नजर आते हैं

नियम
स्वतंत्र होते है

पालन
करने वाले
गुलाम होते हैं

गुलामी
कुछ ना कुछ
दे जाती है

स्वतंत्रता
पागलों के
काम आती है

स्वतंत्रता
सपने जगाती है

सोना
बहुत जरूरी है

गुलामों को
नींद जरूरत से
ज्यादा आती है

गुलाम बहुत
आतुरता के साथ
स्वतंत्रता
लिखना चाहता है

लिखना
शुरु करता है

मालिक

सपने में
आना शुरु
हो जाता है

‘राम’ ईश्वर है

‘उलूक’ गुलाम
उसके नाम पर
तुझे धमका कर
तेरा क्रिया करम
श्राद्ध सब

अभी
और अभी
यहीं कर देना
चाहता है

देश
स्वतंत्र हुआ था
गुलामों से

कुछ सुना था

फिर क्यों
हर तरफ अपने
आसपास

अपने ऊपर
किसी एक
गुलाम का
साया नजर
आता है

घर में ही
घर के
भेड़िये
नोच रहे
होते हैं
अपनी भेड़ें
अपने हिसाब से

शेर
का गुलाम

शेर की
एक तस्वीर
का झंडा
ला ला कर
क्यों लहराता है ?

चित्र साभार: https://apptopia.com/

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...