डूबेगी नहीं पता है
डुबाने वाला पानी ही बहुत बेशरम है
बैठे हैं डूबती हुई नाव में लोग
हर चेहरे पर फिर भी नहीं दिख रही है कोई शरम है
पानी नाव में ही भर रहा है
नाव वालों के अपने भी करम हैं
डुबोने वाले को तैरने वालों के भी
ना जाने क्यों डूब जाने का भरम है
अच्छाई से परेशान होता है बुराई पर नरम दिखता है
दिखाने के लिये थानेदार बना बैठा है
थाने का हर सिपाही भी
नजर आता है जैसे बहुत गरम है
लिखा होता है बैनर होता है
आध्यात्मिक होता है ईश्वरीय होता है
विश्वविद्यालय होता है सब कुछ परम है
याद आ गयी तो देखने चल दिये
पता चलता है कुछ भी नहीं है
बस एक बहुत बड़ा सा एक हरम है
अजीब है रिवायते हैं
किसी को पता भी नहीं होता है
क्या करम है क्या कुकरम हैं
बस देखता रहता है ‘उलूक’ दिन में भी अंधा है
रात की चकाचौंध का उसपर भी कुछ रहम है ।
चित्र साभार: गूगल
