उलूक टाइम्स: छेड़ छाड़
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शुक्रवार, 13 जून 2014

गौण ही है पर यही है बताने के लिये आज भी

उसके चेहरे पर शिकन नहीं है
सुना है उसकी शोध छात्रा ने
शिकायत की है छेड़ छाड़ की

अच्छे दिन लाने वाले लोगों को
वैसे भी देश देखना है
ये बातें तो छोटे लोग करते हैं तेरे जैसे

कोई हल्ला गुल्ला जब नहीं है कहीं कोई
एफ आई आर नहीं है कोई कहीं
कोई सबूत नहीं है

फिर अगर कोई
खुले आम बिना किसी झिझक
मुस्कुराते हुऐ घूमता है तो
तेरे को काहे चिढ़ लग रही है

लड़के लड़कियाँ परीक्षा दें
या मोमबत्तियाँ लेकर
शहर की गलियों में
शोर करने निकल पड़े
निर्भया होने से तो बच ही गई है

वैसे भी जब तक
कोई अपराध 
सिद्ध नहीं हो जाता है
अपराध कहाँ
और कब माना जाता है

और अगर घर की बात
घर में रहे तो अच्छा होता है

‘उलूक’ तुझे तो
इस सब के बारे में सोच कर ही
झुर झुरी 
हो जाया करती है
उनको पता चल गया तू सोच रहा है
तो बबाल हो जायेगा

उसने किया है तो होने दे
बड़े आदमी के बड़े हाथ
और सारे आस पास के
बड़े लोग उसके साथ

तू अपनी गुड़ गुड़ी 
खुशी से यहाँ छाप
सिर खुजा
और उसको 
मौज करते हुऐ
रोज का रोज देखता जा
फाल्तू की अपनी बात
उलूक टाइम्स में ला
ला कर सजा ।