उलूक टाइम्स: एंटी करप्शन पर अब पढ़ाई लिखाई भी होने जा रही है

शनिवार, 14 जून 2014

एंटी करप्शन पर अब पढ़ाई लिखाई भी होने जा रही है

बड़ी खबर है रहा नहीं गया
कुछ और लिखने की सोचने की
जरूरत ही नहीं पड़ी आज
अखबार की खबर से ही बहुत कुछ मिल गया
अच्छे दिन जब आने ही वाले हैं
इसीलिये अच्छी खबरें भी आ रही हैं
बहुत कुछ होने जा रहा है
आने वाले दिनो में बता रही हैं
असली बात तो 
इन्ही बातों में रह जा रही है
खुशी होने से कलम भी
भटक 
कर उधर को चली जा रही है
तो सुनिये खबर ये आ रही है
विश्वविध्यालय पढ़ायेंगे एंटी करप्शन का पाठ
मानव संसाधन मंत्रालय की मंशा
कुछ इस तरह का बता रही है
डिग्री कोर्सों में होगा 
एंटी करप्शन का टापिक
ये बात समझ में
बहुत अच्छी तरह से आ रही है
पर्यावरण पढ़ाना शुरु किया था
कुछ साल पहले
उसे पढ़ाने के लिये पढ़ाने वाले को
कुछ भी पढ़ने की 
जरूरत कहाँ हो जा रही है
कामर्स विषय वाली
कामर्स विभाग में
पर्यावरण पढ़ा ले जा रही है
इतिहास भी होता है पर्यावरण में
इतिहास वाली अपने विभाग में
बता पा रही है
करप्शन पर भी किसी ट्रेनिग की
जरूरत नहीं पढ़ेगी
विश्वविध्यालयों के लोगों को भी
करप्शन का कोर्स
जहाँ की जनता
बहुत पहले से
समझ 
और समझा रही है
अच्छा है
कुछ लोगों की 
ऊपरी आय
कर लेने 
के लिये एक और रास्ता 
अच्छे दिन लाने वाली
एक अच्छी सरकार जल्दी ही लाने जा रही है ।

13 टिप्‍पणियां:

  1. "सत्यमेव जयते" को आदर्शवाक्य बनाने वाले देश में सत्याचार पर अत्याचार का हाल हम सब जानते हैं।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-06-2014) को "बरस जाओ अब बादल राजा" (चर्चा मंच-1644) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. कल 16/जून/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  4. फोरेंसिक साइंस की तरह करप्शन के बारे में पढ़ कर लोग इस तरह करप्शन करना सिख जायेंगे की पकड़ में ना आएं...

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  5. शोध भी होवे करप्शन अपने भागों को रोवे।

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  6. बहुत अच्छी तरह से शब्दों की सुदरता के संग ही अपनी बातें पिरो दी हैं आपने

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  7. यह कविता बहुत सीधी भाषा में बड़ी बात कह देती है। आप अखबार की खबर के बहाने सिस्टम पर तंज कसता है। एंटी करप्शन पढ़ाने की बात सुनकर हँसी भी आती है और सोच भी। आम लोग तो करप्शन को सालों से देख रहे हैं और समझ रहे हैं। आप यह दिखाते है कि सिर्फ कोर्स जोड़ने से हालात नहीं बदलते। पढ़ाने वाला बिना तैयारी पढ़ा देगा, जैसे पहले होता आया है।

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