http://blogsiteslist.com
कटोरा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कटोरा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 23 अगस्त 2017

पढ़ने वाला हर कोई लिखे पर ही टिप्पणी करे जरूरी नहीं होता है

जो लिखता है
उसे पता होता है

वो क्या लिखता है
किस लिये लिखता है
किस पर लिखता है
क्यों लिखता है

जो पढ़ता है
उसे पता होता है
वो क्या पढ़ता है
किसका पढ़ता है
क्यों पढ़ता है

लिखे को पढ़ कर
उस पर कुछ
कहने वाले को
पता होता है
उसे क्या
कहना होता है

दुनियाँ में
बहुत कुछ
होता है
जिसका
सबको
सब पता
नहीं होता है

चमचा होना
बुरा नहीं होता है

कटोरा अपना
अपना अलग
अलग होता है

पूजा करना
बहुत अच्छा
होता है

मन्दिर दूसरे
का भी
कहीं होता है

भगवान तैंतीस
करोड़ बताये गये हैं

कोई
हनुमान
होता है
कोई राम
होता है

बन्दर
होना भी
बुरा नहीं
होता है

सामने से
आकर
धो देना
होली का
एक मौका
होता है

पीठ पीछे
बहुत करते हैं
तलवार बाजी

‘उलूक’
कहीं भी
नजर नहीं
आने वाले
रायशुमारी
करने वालों का
सारे देश में
एक जैसा एक ही
ठेका होता है ।

चित्र साभार: Cupped hands clip art

गुरुवार, 23 अप्रैल 2015

जय जय जय हनुमान मतलब एक स्पेशियल मेहमान

एक होता है बन्ना
एक होती है बन्नी
बन्ने की शादी
बन्ने से होनी है होती
कुछ को देने
होते ही हैं निमंत्रण
चाहिये ही होते हैं
थोड़े बहुत गवाह
अब्दुल्ला भी होता है
दीवाना भी होता है
शादी का माहौल
कुछ अलग सा
बनाना ही होता है
कुछ खुश होते हैं
कुछ दुखी होते हैं
कुछ की निकल
रही होती है आह
सबसे गजब का होता है
एक खास मेहमान
बन्ने और बन्नी से
भी कहीं ऊपर जैसे
बहुत ऊपर का भगवान
भगवानों में भी
कई प्रकार होते हैं
कुछ बिना कार होते हैं
कुछ अपने होते हैं
कुछ पराये होते हैं
कुछ बेकार होते हैं
एक सबसे अलग होता है
जैसे ही जलसे में पहुँचता है
एक जलजला होता है
बन्ने और बन्नी को
लोग भूल जाते हैं
मेहमान के चारों
ओर घेरा बनाते हैं
मेहमान जवान हो
जरूरी नहीं होता है
जब तक जलसे
में मौजूद होता है
बस और बस वही
एक बन्ना होता है
घेरने वालों के चेहरे
में रौनक होती है
भवसागर में तैराने
की जैसे उसके हाथ में
एक ऐनक होती है
शादी कुछ देर
रुक जैसा जाती है
बन्ना बन्नी को
जनता भूल जाती है
जो होता है बस वो
मेहमान होता है
निमंत्रण में आये हुऐ
लोगों के लिये
भगवान होता है
‘उलूक’ हमेशा की तरह
आकाश में कहीं
देख रहा होता है
चम्मच बिन जैसे
एक कटोरा होता है ।

चित्र साभार: www.clipartpanda.com

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

अस्थायी व्यवस्था

हर तीसरे साल
के बाद बदल दिया
जाता रहा है
मेरी सस्ते गल्ले की
दुकान का मालिक
बात है ना मजेदार

उसके बाद चाहे तो भी
रुक नहीं पाता है
कोई भी हो ठेकेदार

बहुत समय से जबकी
लग जाते हैं इस काम में
लोग सपरिवार

दुकान का ठेका
उठाना चाह कर भी
नहीं हो पाते हैं
सफल हर बार

कोशिश करते ही
रह जाते हैं बेचारे
छोटे किटकिनदार

सरकार के काम
करने के सरकारी
तरीके को खुद कहाँ
जानती है सरकार

कुछ ऎसा ही एक
नजारा देखने में
आया है इस बार

एक बादल बेकार
नाराज हो कर
फट गया जा कर
एक कोने में
कहीं सपरिवार

ठेका देने वाले को
खुद उठाना पड़ा
एक कटोरा और
जाना पड़ गया
दिल्ली दरबार

प्रश्न गंभीर हो गया
अचानक
कौन चलायेगा
इस दुकान
को इस बार
आपदा की
इस घड़ी में
कौन ढूँढने जाता
एक सस्ते गल्ले की
दुकान के लिये
एक अदद ठेकेदार

मजबूरी में तंत्र
हुआ बेचारा लाचार
पकड़ लाया एक
पकौड़ी वाला जो
बेच रहा था
आजकल
कहीं पर
अपने ही अचार

कहा है उससे
जब तक हम
देते नहीं
दुकान को
एक अपना
ठेकेदार

तुझे ही
उठाना है
गिराना है
शटर इसका
पर पकाना
नहीं पकौड़े यहाँ

नहीं आना
चाहिये ऎसा
कोई अखबार
में समाचार ।

मंगलवार, 13 मार्च 2012

मिल गया मिल गया .. लीडर

बिल्लियों
की
लड़ाई में
बंदर रोटी
खा गया

बिल्लियों
के
रिश्तेदारों
को
बहुत रोना
आ गया

यहाँ का
बंदर
मलाई खुद
जब
खाता नहीं

बिल्लियों
को बंदर
इसी लिये
भाता नहीं

साँस्कृतिक
जंगल में
उदासी सी
छा गयी

बहुत से
जानवरों
को
मूर्छा जैसी
आ गयी

आगे
बंदर अब
बिल्लियों
को नचायेगा
या
बिल्लियों द्वारा
बंदर
फंसाया जायेगा

यह तो
आने वाला
समय ही
बता पायेगा

लेकिन
अफसोस

बहुत सी
स्थानीय
बिल्लियों
का कटोरा
वापिस
पांच साल
के लिये
फिर से
उल्टा
हो जायेगा

मुझे
वाकई में
बहुत ही
रोना आयेगा ।

सोमवार, 28 नवंबर 2011

ब्लाग का भिखारी

किस्म किस्म
के पकवान
लेकर रोज
पहुंचे
पहलवान

सुबह के
नाश्ते से
लेकर
शाम का
भोजन
तैयार है

किसी में
नमक
ज्यादा
तो कोई
पकने से
ही कर
चुका
इन्कार है

फिर भी
हर कोई
खिलाना
चाहता है
ना खाओ
तो भी
चिपकाना
चाहता है

कोई
पेट खराब
के बहाने
से खुद
को बचा 

ही ले
जाता है

किसी को
व्रत त्योहार
का बहाना
बनाना
बहुत अच्छी
तरह से
आता है

कुछ
मजबूरी
में
पसंद पे
चटका
लगा कर
हाथ
झाड़ लिया
करते हैं

बहुत से
कुछ नहीं
पकाते हैं

इधर
का खाना
उधर से
उधार लिया
करते हैं

बाजार में
हलचल है
लोग तेजी
से इधर
उधर जा
रहे हैं

पूछने पर
पता चला
वो भी
शाम को
अब यहीं
कहीं आ
जा रहे हैं

लोग मेरे
शहर के
बहुत खुश हैं

वो अब
चाटने के                
लिये नहीं
आता है
सन्नाटा
हो गया
हो कहीं पर
धमाका
रोज यहां
वो कर
जाता है

किसी को
कैसे चले
पता अब वो
यहां का चटोरा
बन गया है

लोग भी
कैसे मुंह
बचायें अपना
भिखारी
का एक
कटोरा
बन गया है

दे दे
अल्ला के
नाम पर
एक पसंद
का चटका
दे भी दे
तेरा क्या
जायेगा

जो दे
उसका भी
भला होगा
जो ना दे
वो भी
कभी अपने
लिये कुछ
मांंगने
के लिये
आयेगा ।

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...