उलूक टाइम्स: अविनाश वाचस्पति की याद आज चिट्ठे के दिन बहुत आती है श्रद्धाँजलि बस कुछ शब्दों से दी जाती है

चिट्ठा अनुसरणकर्ता

बुधवार, 1 जुलाई 2020

अविनाश वाचस्पति की याद आज चिट्ठे के दिन बहुत आती है श्रद्धाँजलि बस कुछ शब्दों से दी जाती है



चिट्ठों के जंगल में उसने एक चिट्ठा बोया है 
जिस दिन से बोया है चिट्ठा वो खोया खोया है 

चिट्ठे चिट्ठी लिखते हैं कोई सोया सोया है 
चिट्ठी लेकर घूम रहा कोई रोया रोया है 

चिट्ठे ढूँढ रहे होते हैं चिट्ठी चिट्ठी चिट्ठों में छुप जाती है 
पता सही होता है गलत लिखा है बस बतलाती है 

चिट्ठों की चिट्ठी चिट्ठों तक पहुँच नहीं पाती है 
चिट्ठे बतलाते हैं चिट्ठे हैं आवाज नहीं आ पाती है 

चिट्ठों ने देखा है सबकुछ कुछ चिट्ठे गुथे हुवे से रहते हैं 
चिट्ठों की भीड़ बना चिट्ठे चिट्ठी को कहते रहते हैं 

चिट्ठा चिट्ठी है चिट्ठी चिट्ठा है बात समझ में आती है 
चिट्ठे के मालिक की चिट्ठी कैसे कहाँ कहाँ तक जाती है

नीयत और प्रवृति किसी की कहाँ बदल पाती है 
शक्ल मुखौटों की अपनी असली याद  दिला जाती है 

अविनाश वाचस्पति की याद आज चिट्ठे के दिन 
उलूकको बहुत आती  है बहुत आती है ।



22 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा भी सादर नमन।
    सादर प्रणाम🙏🙏

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  2. नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरूवार 02 जुलाई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. अविनाश वाचस्पति जी को नमन 🙏🙏

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  4. अभिन्न मित्र अविनाश वाचस्पति को नमन करता हूँ....

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  5. साहित्य की ऐसी महान विभूति को ह्रदय पुष्पों की विनम्र श्रद्धांजलि।
    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति आपकी।

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  6. बहुत भावभीनी और शब्दव्यूह से भरी श्रद्धांजलि

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  7. ॐ शान्ति
    अविनाश वाचस्पति जी को नमन
    श्रद्धा से सर झुका कर विनम्र श्रद्धांजलि

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  8. ब्लॉग जगत के जाने माने अविनाश जी को मेरा नमन ...
    विनम्र श्रधांजलि ...

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  9. आदरणीय सुशील जी , बहुत भावपूर्ण पोस्ट है आपकी | ये बात भावुक कर जाती है कि हमें रास्ता दिखाने वाला मसीहा चुपके से क्यों अनंत में खो जाता है ? अविनाश वाचस्पति जी को नमन
    और विनम्र श्रद्धांजलि|

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