उलूक टाइम्स: 2021

गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

हमारे खून में है गिरोह हो जाना तू अलग है बता क्या और होना चाहता है

 

कितना भी
कोशिश करें 
हम
शराफत पोतने की
दिख जाता है कहीं से भी 
फटा हुआ
किसी छेद से झाँकता हुआ हमारा नजरिया

हम
कब गिरोह हो लेते हैं
हमें
पता कहाँ चलता है

हम कहा है
उसमें हो सकता है
तुम नहीं आते होगे
बुरा मत मानियेगा

हम कहा है
हमारी ओर
धनुष मत तानियेगा

हम कहने का मतलब
मैं और मेरे जैसे कुछ लोग होते हैं
जो सफेद नहीं होते हैं
सफेद पोश होते हैं

कई दिनों तक
कुछ भी नहीं लिखना
अजीब बात होती है

बकवास
करने वाले के लिये
दिन भी रात होती है

पता कहाँ चलता है

लिखने लिखाने का नशा
कब और कहां उतर जाता है

एक पैग़ का
एक पन्ना होता होगा
दूसरा पैग
हाथ में आने से पहले
हवा के साथ ही पलट जाता है

किससे कहे कोई
लिखने लिखाने में
किस सोच में डूबे हो तुम
महीना गुजर जाता है

कुछ नहीं पर
कुछ भी नहीं
लिख पाने का 
गम होना
शुरू हो जाता है

कुछ गिनी चुनीं टिप्पणियाँ
गिनती की जाती हैं
आने जाने वालों का
हिसाब भी समझ में आता है

लिखना लिखाना
कविता कहानियाँ
शेरो शायरियोँ
से गिना जाना शुरु हो लेता है

बकवास करने वालों को
गुस्सा आना
जायज नजर आता है

किसलिये मिलाना है
कविता और
कवि की दुनियाँ को
पागलों की दुनियाँ से

हर एक आदमी
बस एक आदमी है

पागल ‘उलूक’
रात के अंधेरे में
अपनी बंद आँख से
पता नहीं क्या देखना
क्या गिनना चाहता है?

चित्र साभार: https://www.pinterest.es/

बुधवार, 10 मार्च 2021

और खड़ा हो लेता है प्रतियोगिता में विद्वानों के साथ

 

किसलिये समझा रहे हो

मुझे 
पता है मुझे भी मरना ही है

लेकिन मैं आपके कहने पर
मौत को गले नहीं लगा सकता हूं

मैं मरूँगा 
तो गुरु जी के कहने पर ही 
मरूँगा

गुरु जी
मरने के रास्ते समझाने के लिये प्रसिद्ध हैं

फिर किसलिये
आप जैसे नये नवेले से सीखना मरना
 
मुझे भी तो
वैसे भी मरना ही है कभी ना कभी 

और मुझे ये भी पता है
कि मैं एक मेमना हूँ
और वो एक भेड़िया है

तुम्हें क्या परेशानी है
एक मेमने के 
भेड़िये के साथ प्रेमालाप करने से

जमाना बदल रहा है और भेड़िया भी
जमाने के हिसाब से

भेड़िया
अब कार में नहीं दिखता 
है कभी
उसकी कार घर में खड़ी रहती है

भेड़िया
अब पैदल चलता है देखते क्यों नहीं हो 

तुम्हें भी
जमाने के हिसाब से
बदलना जरूरी है

मेमने के बारे में किसलिये सोचते हो
भेड़िये को देखो ध्यान मत भटकाओ

लिखना लिखाना ठीक है
लिखा हुआ अगर कविता हो गया
तो उस से ब‌ड़ा शाप नहीं हो सकता है

बकवास करने के कुछ नुकसान
कविता हो जाना भी है
दीवार में खींची हुई  कुछ लकीरों के

और इसी तरह के
कुछ लिखे लिखाये से प्रश्न उठना शुरु होते हैं

कोई कुछ भी लिख देता है
और खड़ा हो लेता है
प्रतियोगिता में विद्वानों के साथ।

चित्र साभार: https://www.123rf.com/

बुधवार, 3 मार्च 2021

बकवास बिना कर लगे है करिये कोई नहीं है जो कहे सब पैमाने में है

 

सालों हो गये
कुछ लिख लेने की चाह में
कुछ लिखते लिखते पहुँच गये
आज इस राह में

शेरो शायरी खतो किताबत
पता नहीं क्या क्या सुना गया लिखा गया

याद कुछ नहीं रहा
बस एक मेरे लिखे को
तेरे समझ लेने की चाह में

वो सारे
तलवार लिये बैठे हैं हाथ में
सालों से
कलम छोड़ कर बेवकूफ
तू लगता है
ले कर बैठेगा एक कलम भी कब्रगाह में

उनके साथ हैं
उन की जैसी सोच के लोग हैं

और 
बड़ी भीड़ है 
कोई बात नहीं है 

तेरा जैसा है ना एक आईना 
देख ले खुश हो ले 
तेरे साये में है

झूठ के साथ हैं 
कई झूठ हैं सब साथ में हैं
आज हैं और डरे हुऐ हैं
डराने में हैं

जहर खा लो कह लो
कह देने वाले
कहीं कोने में बैठे हैं बेगानों में हैं

‘उलूक’
लिखना है तुझे
कुछ बकवास सा ही हमेशा

कोई
कर नहीं लगना है
इस वित्तीय साल का
अंतिम महीना भी अब
कुछ कुछ
निकल जाने में है।

चित्र साभार: https://www.dreamstime.com/

रविवार, 28 फ़रवरी 2021

किसी महीने बरसात कम होती किसी महीने बकवास कम होती



करते करते
बकवास निरन्तर
सुजान हो चले जड़मति
ये भी तो किस्मत है होती

अभ्यास
समझ रोज का लेखन
आभासी कलम पन्ने जोतती
खुद ही कुछ बोती

जमा होते चले 
आगे के पीछे पीछे के आगे
आँखें मूंद वर्णमाला के मोती पर मोती

वाक्य चढ़े वाक्य के ऊपर
शब्दों की पहन कहीं अटपटी
कहीं फटी एक धोती

चित्र जड़े श्रँगार समझ कर
कुछ हल्के पर कुछ भार पटक कर
लिख डाली पोथी पर पोथी

धुँआ सोच कर हवा नोच कर
राख बनाते लिखे लिखाये अंगार दहक कर
कविता घोड़े बेच कर सोती

समझ समझ कर समझा लिखना
घुप्प अँधेरा जिसको दिन दिखना
सुबह सवेरे शुरु रात है होती

लिखना भर कर पेट गले तक
घिस घिस लिख कर गले गले तक
‘उलूक’ बेशरम पढ़ने वाले की आँखे
रोती हैं तो रोती।

चित्र साभार: https://www.123rf.com/

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

घर के कुत्ते ने शहर के कुत्ते के ऊपर भौंक कर आज अखबार के पन्ने पर जगह पाई है बधाई है ‘उलूक’ बधाई है


अखबार में
फोटो आई है
सारा घर मगन है

मालिक
कभी दिखाया नहीं जाता है
घर के कुत्ते ने बहुत धूम मचाई है

घर में
भौंकता नहीं है कभी
कटखन्ने होने की मिठाई है

किसी को
 कभी काटा नहीं
किसी को कभी भौंका नहीं
अपने को बचाने की कीमत मिली है
या
किसी ने कीमत चुकाई है

बजट
अभी अभी निकला है
जनता समझ नहीं पायी है

कुत्ते कुत्ते
पट्टे पट्टे
खबर किस ने पहुंचाई है
खबर
मगर लाजवाब आई है

मालिक की
खबर की जगह
एक कुत्ते की खबर
हमेशा पव्वे के सहारे
अद्धे ने पहुंचाई है

कुत्ता
घूमता रहता है शहर शहर
मालिक की आज बन आई है

कुत्ते ने
अखबार में जगह पा कर
मालिक को दी बधाई है

जय जय कार है अखबार की
गजब की खबर एक आज बना के दिखाई है

कुत्ते को पता नहीं है कुछ भी
उसने आज भी उसी तरह अपनी पूंछ हिलाई है
 
मालिक सोच में पड़ा है
उसकी खबर किसने क्यों और कैसे उड़वाई है

‘उलूक’
कुत्ते पाला कर
शहर में भी भेजा कर
अखबारों की जरूरत आज बदल कर
नई सोच उभर कर आई है

अच्छा करना
ठीक नहीं
कुत्ते ने कुत्ते के ऊपर भौंक कर
आज अखबार के पन्ने पर जगह पाई है ।

शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

बकवास करने वाले हैं कुछ बेगार ही सही बेगार लिख रहे हैं


सबसे अच्छा है
कुछ नहीं लिखना
कई कई दिनों तक
पन्नों में नहीं दिखना

किसी ने पूछना नहीं है
 क्यों नहीं दिख रहे हो
किसे मतलब है
कहने से
किसलिये
बकवास करने से आजकल बच रहे हो

लिखने लिखाने वाले सभी
कुछ ना कुछ लिख रहे हैं
सब अपनी अपनी जगह पर
अपने हिसाब से दिख रहे हैं

कोई देश लिख रहा है
कोई प्रदेश लिख रहा है
कोई शहर लिख रहा है
कोई प्रहर लिख रहा है

किस ने रोका है तुझे लिखने से
नहर लिख
किसी ने नहीं कहना है
किसलिये नहर लिख रहा है

जो हो रहा है
उसे उसी तरह किसने लिखना है
कुछ हिसाब किताब
बही खाते के हिसाब से लिख
और पूछ
लिखने वाले से
क्या जी एस टी दे कर आया है
जो किताब लिख रहा है

कुछ सरकार लिख रहे हैं
कुछ बेकार लिख रहे हैं
बेगार लिखना गुनाह नहीं है
राग दरबार लिख रहे हैं
लिख ‘उलूक’ लिख
तेरे लिखने से
कुछ नहीं कर सकने वाले
लिखने लिखाने के तरीके के
कारोबार लिख रहे हैं

समझ में आना ना आना
अलग बात है
कुछ तो है कहीं यहीं
लिखने लिखाने वालो के लिये
बकवास करने वाले हैं कुछ
बेगार ही सही
बेगार लिख रहे हैं।

चित्र साभार: http://clipart-library.com/


सोमवार, 18 जनवरी 2021

एक चोर का डैमेज कंट्रोल वाह वाही चाहता है अखबार उसकी एक पुरानी खबर के बाद बस चुप हो जाता है

 


बहुत
हो गया है

कूड़ा
हो ही जाता है
कूड़े का डिब्बा
गले गले तक भर जाता है

होना
कुछ नहीं होता है
पता होता है

फुसफुसाने में
सब खो जाता है

बड़ी खबर
किसने कह दिया
आपके सोचने से होगी

आदमी
देख कर
खबर का खाँचा
बनाया जाता है

प्रश्न
प्रश्न होता है
क्या होता है
अगर किसी को
बता दिया जाता है

किसने बताया
किसको बताया
किसलिये पूछना चाहता है

जहाँ
कुछ नहीं होना होता है

वहाँ
एक कबूतर
हवा में उड़ा दिया जाता है

सजा
जरूरी होती है
मिलती भी है उसे

जिसको
पूछने की आदत के लिये
तमगा कभी दिया जाता है

शरीफ और नंगे
का अंतर
बहुत बारीक है

जमाना
किसे आगे देखना चाहता है

अभी अभी
देख कर उड़ा है
‘उलूक’
कुछ मुँह छुपा कर अपना

जो हुआ है
सब को पता है
जीत किसकी हुई
चोर चोर मौसेरे
घूँम रहे हैं खुले आम

एक शरीफ
अपना मुँह चुल्लू में डुबाना चाहता है ।

चित्र साभार: http://www.onlineaudiostories.com/

शनिवार, 9 जनवरी 2021

नंगा सच है नंगई ईश्वरीय है

मत लिखा कर
हर समय गीला सा
सुखा लिया कर
लिखा अपना सीला सा

आग नहीं लगती है
लिखा गीला होता है
सीलन सुलगती नहीं है

रोज लिखना
हर समय दिखना
इसलिये ठीक नहीं होता है
लिखाई भी हर समय बहकती नहीं है

लिखा कर
कोई नहीं कहता है नहीं लिख
बस फूँक लिया कर लिखते लिखते लिखे को
स्याही सूखे बिना चमकती नहीं है

आग लिख या राख लिख
किसे मतलब है
लगी आग से बनती राख तक
जरूरी है खबर बनना
अखबार बिकता है
पकी पकाई से
कच्ची खबर बिकती नहीं है

किसलिये लिखना
हो रहे को यूँ ही
बिना मिर्च बिना मसाले के

शाम के गिलास में
शराब
बिना बात के
यूँ ही कहीं
जा गिरती नहीं है

सबको
पता होता है
सब जानते हैं लिखावट
हर लिखे की
चिट्ठियाँ आती है
किसी और के नाम से
लिखने वाले के
शहर में नहीं होने की खबर
कहीं छपती नहीं है

‘उलूक’
नोच
अपने गंजे सर के बचे बालों को
नगों की मौज रहेगी हमेशा

नंगा सच है
नंगई करना ईश्वरीय है

मंदिर बना कहीं भी 
नंगे का किसी 
कोई रोक है कहीं
कहीं दिखती नहीं है।

चित्र साभार: ttps://www.gograph.com
/

सोमवार, 4 जनवरी 2021

फिर फटेंगे ज्वालामुखी फैलेगा लावा भी कहीं बैठा रह मत लिखा कर कोई कहे भी अगर लम्बी तान कर बैठा है

 



कलम अपनी
ढक्कन में
कहीं डाल कर बैठा है 

एक लम्बे समय से
आँखें निकाल कर बैठा है 

कान खुले हैं मगर
कटोरा भर तेल डाल कर बैठा है 

बड़बड़ाना जारी है
मुँह में रुमाल डाल कर बैठा है 

सारे पूछ कर
कुछ करने वालों को
सलाम मार कर बैठा है 

पूछने वालों के
कुछ अलग ही होते काम हैं
मान कर बैठा है ।

सब पूछते हैं
सबके पास कुछ है पूछने के लिये
खुद भी पूछना है
कुछ ठान कर बैठा है 

किसी के लिये
पूछने में भी लगा है
सुबह से लेकर शाम पूछने की दुकान पर
कुँडली मार कर बैठा है 

मोटी खाल
समझने में लगा है आजकल
मोटी खाल का मोटी खाल के साथ
संगत
कमाल कर बैठा है 

शरम बेच कर
मोटी खाल बेशरम
मोटी खालों के संगम के प्रबंधन का
बेमिसाल इंतजाम कर बैठा है 

बैठने बिठाने के चक्कर में बैठा
कोई कहीं जा बैठा है
कोई कहीं जा बैठा है 

‘उलूक’
अभी बहुत कुछ
सिखायेगी तुझे जिंदगी

इसी तरह बैठा रह
शाख पर किसी टूटी
श्मशान के सूखे पेड़ की 

शरम करना
छोड़ दे अभी भी
देख और मौज ले नंगई के
और कह
अट्टहास के साथ

नंगा एक
नंगों के साथ मिलकर
कितनी शान से
हमाम लूट कर बेमिसाल बैठा है ।

चित्र साभार: https://www.canstockphoto.com/