सुना गया है
अब हर कोई एक खुली हुयी किताब है
हर पन्ना जिसका झक्क है सफेद है और साफ है
सभी लिखते हैं आज कुछ ना कुछ
बहुत बड़ी बात है
कलम और कागज ही नहीं रहे बस
बाकी सब इफरात है
बाकी सब इफरात है
कोई नहीं लिखता है कहीं
किसी भी अन्दर की बात को
ढूँढने निकलता है एक सूरज को मगर
वो भी किसी रात को
वो भी किसी रात को
सोचता है साथ में
सब दिन दोपहर में
कभी आ कर उसे पढ़ें
कुछ वाह करें कुछ लाजवाब
कुछ टिप्पणी कुछ स्वर्णिम गढ़ें
कुछ टिप्पणी कुछ स्वर्णिम गढ़ें
समझ में
सब के सब कुछ
बहुत अच्छी तरह से आता है
जितने से जिसका काम चलता है
उतना समझ गया होता है
उसे ढोल नगाड़े साथ ला कर
खुल कर जरूर बताता है
उतना समझ गया होता है
उसे ढोल नगाड़े साथ ला कर
खुल कर जरूर बताता है
जहाँ फंसती है जान
होता है बहुत बड़ी जनसंख्या से जुड़ा
कोई उनवान
शरमाना दिखा कर
अपने ही किसी डर के खोल में घुस जाता है
किस अखबार को
कौन कितना पढ़ता है
सारे आँकड़े सामने आ जाते हैं
किस अखबार में
कैसे अपनी खबर कोई
हर हफ्ते छपवा ले जाता है
कैसे हो रहा है होता है
ऐसा कोई पूछने ही नहीं जाता है
कैसे अपनी खबर कोई
हर हफ्ते छपवा ले जाता है
कैसे हो रहा है होता है
ऐसा कोई पूछने ही नहीं जाता है
कोई नजर नहीं आता है का मतलब
नहीं होता है
कि समझ में नहीं आता है
उलूक के लिये बस एक राय
लिखना लिखाना छपना छपाना कहीं भीड़ कहीं खालिस सा वीराना
‘उलूक’ ठीक नहीं थोड़ा सा समझने के लिये इतने सारे साल लगाना
चित्र साभार: https://www.123rf.com/
आभार पाठक
'उलूक टाइम्स' पर जुलाई 2016 के अब तक के अधिकतम 217629 हिट्स को
अगस्त 2019 के 220621 हिट्स ने पीछे छोड़ा पुन: आभार पाठक














