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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

राजा हैं और बहुत हैं चैन से जीना है तो सीख राजाओं की सुनना और राजाओं का हुकुम बजाना

राजशाही राज्य और राजा
एक नहीं कई कई हुआ
करते थे किसी जमाने में
जमाना बदला राज्य मिटे
राजशाही मिटी सीमायें हटी
जमीने साथ मिली देश बना
बदल गया बदल गया
का डंका बजा
थोड़ा नहीं बहुत जोर से बजा
हल्ला गुल्ला शोर शराबा
होना शुरु हो गया
मोहल्ले की छोड़िये
गली गली में तमाशा हो गया
एक बार हुआ फिर कई बार हुआ
और अब होने लगा हर साल
कोई नहीं कहता इस बार नहीं हुआ
राजा पहले एक दो हुआ करते थे
बाकी होते थे भेड़ और बकरियाँ
कहा जाता था प्रजा हुआ करते थे
जमाने ने जमाना बदलने
के साथ अपने को बदला
अंदाज नहीं आया
पर राजा ने राजशाही
को भी बदला
पहले की तरह कोई एक दो
के होने से अच्छा
कोई भी कहीं भी हो ले
का अलिखित
नियम चल निकला
सीमायें निर्धारित हुई
अपने अपने हिसाब से
अपने चारों ओर
अपने मतलब
का राज्य सोच
अपनी लाईन देख
कोई भी राजा हो
अपने अपने बिलों से
बिना मुकुट धनुष तीर
के मुस्कुराता
अपने मन ही मन
कोई एक किसी और का
माँगा हुआ चोला डाल
सड़क पर नंगे पैर
प्रजा होने का
नाटक करने निकला
आज हर दूसरा राजा और
उसका अपने हिसाब का
अपना राज्य
उसके अपने नियम
बाकी बचे का पैर जैसे
कैले के छिलके में हो फिसला
‘उलूक’ सोच मत
देखता चल
जिंदा रहना है तो
पालन करना सीख
अपने आगे के
राजा का हुकम
बजाना सीख
पीछे के राजा को सलाम
करने के लिये अपने दोनो
हाथों को अपने सिर
पर ले जाना सीख
नहीं कर सकता है
तो सीख ले थोड़ा
पागल और थोड़ा
दीवाना हो जाना
आसमान को देख
नोचना अपने ही बाल
और ठहाके साथ में लगाना ।

चित्र साभार: www.graphicsfactory.com

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