उलूक टाइम्स: चैन लिखना बेचैनी होते हुऐ किसलिये सोचना क्या रखी है और कहाँ रखी है

रविवार, 13 दिसंबर 2020

चैन लिखना बेचैनी होते हुऐ किसलिये सोचना क्या रखी है और कहाँ रखी है

सारे बेचैनो ने
लिख दिये हैं चैन
दरो दीवार छोड़िये सड़क मैदानों तक में 

लिखे को पढ़िये पन्ने दर पन्ने
किसलिये  ढूंढनी है 
कलम किस की है और कहाँ रखी है 

कुछ कहां हो रहा है
किसलिये बैचेन है
चैन ढूंढ और जमा कर पैमाने तक में 

लिखते चले जा
खाली गिलास खाली बोतल
किसने देखनी है किसकी है और कहाँ रखी है 

चैन और बेचैनी
रिश्ता बहुत पुराना है
खोज ना जा कर घर से लेकर मैखाने तक में 

मिलेगा जरूर
कुछ राख कुछ धुआँ
कुछ टुकड़े बचे बीड़ी के भी
कौन लिखता है हिसाब बही कहाँ रखी है 

बेचैनी  लिखने में भी दिख जाता है चैन
चैन से नहीं लिखा कर बैचनी यूँ ही खदानों तक में 

खोदना तुम को आता है
किसे मालूम है जरूरी है कुदालें भी किसे पता है कहाँ रखी हैं 

‘उलूक’ जानता है
चैन है ही नहीं कहीं सारे 
बेचैन हैं बताते नहीं हैं 

लिखा करना जरूरी है चैन
अपने लिये ना सही
बेचैन के लिये सही बेचैनी है पता है कहाँ रखी है।

चित्र साभार: https://webstockreview.net/

38 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 14 दिसंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सच में रिश्ता बहुत पुराना है।
    लाजवाब रचना।
    आपको काफ़ी दिनों बाद पढ़ा
    चैन मिला 😀

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  3. ‘उलूक’ जानता है
    चैन है ही नहीं कहीं सारे बैचेन हैं
    अति सुन्दर !!

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  4. सच चैन किसे है आजकल, सब भागते जा रहे हैं चैन के पीछे लेकिन वह है कि किसी को नसीब ही नहीं होता
    बहुत सही

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  5. सादर नमस्कार ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (15-12-20) को "कुहरा पसरा आज चमन में" (चर्चा अंक 3916) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

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  6. अगर अपनी कलम को अपनी तरक्की की सीढ़ी बनाना चाहते हो तो तख़्तनशीन की शान में कसीदे पढ़ते हुए उसके ख़िलाफ़ साजिशें रचो, षड्यंत्र करो और मौक़ा पाते ही उसकी पीठ पर वार करो.
    फिर तख़्त तुम्हारा और ताज भी तुम्हारा !

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  7. क्या खूब लिखा है सर,
    बिल्कुल.....
    उलूक’ जानता है
    चैन है ही नहीं कहीं सारे बैचेन हैं..
    साधुवाद ।।।।।।

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  8. सारे बैचेनो ने लिख दिये हैं चैन
    दरो दीवार छोड़िये
    सड़क मैदानों तक में - - प्रभावशाली सृजन हमेशा की तरह एक अलग अंदाज़ लिए - - नमन सह।

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  9. बेचैनी का आलम हर तरफ है, न संतोष है न चैन है, बहुत ही सुंदर जोशी जी, बिल्कुल अनोखी रचना..।

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  10. ‘उलूक’ जानता है
    चैन है ही नहीं कहीं सारे बेचैन हैं बताते नहीं हैं

    लिखा करना जरूरी है चैन
    अपने लिये ना सही
    बेचैन के लिये सही बेचैनी है पता है कहाँ रखी है।

    –कुछ कहने के लिए नहीं बचा
    साधुवाद

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  11. वो गाना याद आ गया.."पता नाम लिखकर, यूं ही कहीं रखकर, भूले कोई जैसे.।। बडी सूनी सूनी है जिन्दगी ये जिन्दगी।😀

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  12. लिखे को पढ़िये पन्ने दर पन्ने
    किसलिये ढूंढनी है
    कलम किस की है और कहाँ रखी है...वाह!सराहनीय सृजन आदरणीय सर।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
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  15. बेचैनी से राहत के लिए ही तो सब है; ताकि चैन, जो उल्लू की तरह शाख पर बैठा है, आकर दिमाग में बैठ जाए. गज़ब लिखा आपने, बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  16. गुरुदेव आपका ब्लॉग बहुत अच्छा है कुछ नया सिखने को मिलता है धन्यवाद - उत्तराखंड के बारे में जानकारी

    जवाब देंहटाएं
  17. बेचेनों के बीच चैन की तलाश करती रचना ... बहुत खूब ...

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  18. ‘उलूक’ जानता है
    चैन है ही नहीं कहीं सारे बेचैन हैं बताते नहीं हैं

    लिखा करना जरूरी है चैन
    अपने लिये ना सही
    बेचैन के लिये सही बेचैनी है पता है कहाँ रखी है,
    क्या अंदाज है और क्या बात है , बहुत खूब कहा, बधाई हो आपको

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  19. सुशील महोदय को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

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  20. ‘उलूक’ जानता है
    चैन है ही नहीं कहीं सारे बेचैन हैं बताते नहीं हैं
    लिखा करना जरूरी है चैन
    अपने लिये ना सही
    बेचैन के लिये सही बेचैनी है पता है कहाँ रखी है।
    हर एक के मन में सिर्फ बेचैनी ही तो रखी है..
    सही कहा बेचैन हैं सब बस बताते नहीं...
    वाह!!!
    लाजवाब।

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  21. बात गूढ़ है पर समझ में आते ही दिल में उतरती है । सटीक ! लाजवाब !

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  22. सारे बेचैनो ने
    लिख दिये हैं चैन
    दरो दीवार छोड़िये सड़क मैदानों तक में
    बहुत सुन्दर |

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  23. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं सर ।

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  24. नववर्ष की हार्द‍िक शुभकामनायें जोशी जी

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  25. .
    दैरो हरम में चैन जो मिलता
    क्यों जाते मयखाने लोग !!
    चैन तलाश करना बेकार है ...मन जा भाई !

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