उलूक टाइम्स: 2026

रविवार, 31 मई 2026

तिलचट्टे तिलचट्टे तिलचट्टे बस तिलचट्टे



सभी यहीं हैं कई कई हैं
यट्टे बट्टे सट्टे कट्टे
कितने कितने गिनते गिनते
मौज मनाते तिलचट्टे

इसने लिक्खे उसने लिक्खे
शब्द जोड़ कर हट्टे कट्टे
हवा में उड़ते फर फर फिरते
खिल खिलाते तिलचट्टे

इसके खाए उसके खाए
राजा लाए चोखे लिट्टे
खुशबू पाए घर घर जाए
पाले पोसे तिलचट्टे

किसने पढ़ने किसने लिखने
ढोल बजाते गिरगिट गिट्टे
आंख मूद कर कूद कूद कर
गाने गाएं तिलचट्टे

जिसकी सुलगी उसने उगली
गली गली कित्ते कित्ते
तुलसी सूर कबीर जायसी
लगते आज बित्ते बित्ते

छोड़ ‘उलूक’ मना मौज
रहने दे खुजली
घिस घर पर ही सिलबट्टे
लिखने दे लिखते रहते हैं
उड़ते गिरते चिढ़ते चिढ़ते
तिलचट्टे ही तिलचट्टे |

चित्र साभार: https://www.vecteezy.com/

शुक्रवार, 30 जनवरी 2026

पिता होना बात तो है पर राष्ट्रपिता होना ? कभी न चाहते हुए भी कुछ लिखना जरूरी हो जाता है

हम हैं
कितना हैं
हमको आभास है
अपने उतना होने का
हम बिल्कुल भी नहीं थे
जब तुम थे पूरे से भी जियादा
तुम नहीं थे तब हम हैं
कितना हैं पता नहीं है
हमारे होने और हमारे न होने में
बहुत बड़ा फासला नहीं है
आज हैं कल नहीं भी होंगे
कितना नहीं होंगे
समय फैसला करेगा
तुम कल भी थे आज भी हो
और तुम रहोगे भी
तुम्हारा होना भी उतना ही जरूरी है
तुम थे तब हालात बहुत खराब थे
तुम नहीं थे हालात और भी खराब हो गए
संतुलन की धुरी में
तुमने तब भी बनाए रखा विश्वास
आज भी है तुम्हारे नहीं होने के बाद भी
हमने तुम्हें नहीं देखा हमने तुम्हारे बारे में सुना
कितने भाग्यशाली होंगे वो लोग जो तुम्हारे साथ थे
कितने अभागे हैं हम
तुम नहीं हो हमारे साथ हमारे ही कारण
एक पीढ़ी से लेकर दूसरी पीढ़ी
क्या अनंत तक अंत नहीं है तुम्हारा
आज के दिन तुम्हें याद करना
सबसे जरूरी है
क्योंकि
आज भी वैसे ही दिन हैं
जैसे तब थे जब तुम थे
‘उलूक’ नतमस्तक है तेरे सामने
जब तू नहीं है
राष्ट्रपिता बापू
आज ही नहीं हर दिन तेरा दिन है
नमन |

चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/