बिन्सर की सुरम्य वादियों में बादलों वाले आसमान के नीचे फारेस्ट विस्प में एक साहित्यिक चर्चा !
गिर्दा कहते थे :=
“सावनी साँझ आकाश खुला है ओ हो रे ओ दिगौ लाली।
छानी खरीकों में धुआं लगा है ओ हो रे ओ दिगौ लाली।
थन लागी बाछी कि गै पंगुरी है द्वी - द्वा, द्वी - द्वा दुधी धार छूटी है
दुहने वाली का हिया भरा है ओ हो ये मन धौ धिनाली ओ हो रे ओ दिगौ लाली”।
ऐसी ही एक सावनी सांझ में एक बहुत अच्छी पुस्तक, जिसको एक बहुत अच्छे इंसान ने रचा है, के विमोचन समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। आज बहुत दिन बाद किसी सार्थक साहित्यिक संवाद में शामिल होने का अवसर मिला। साहित्य में अगर आज के समय की चिन्ताएं नहीं हैं तो वह साहित्य, साहित्य नहीं है। वो बस काले या नीले किये पन्ने मात्र हैं। इस तरह प्रो0 सुशील जोशी जी का कविता संग्रह ‘सरगोशियों के स्वर’ अपने आप में एक वक्तव्य है बदले हुए समाज में फैलती विद्रूपताओं के खिलाफ़। सुशील सर का रचना संसार नया नहीं है। वे काफी समय में अपने समय की चिंताओं पर बात करते आये हैं।
सुमित्रा नन्दन पन्त कहते हैं “आह से उपजा होगा गान”। ये जो आह है ये जो पीड़ा है, ये ही कविता बनती है। जब आप जिया हुआ सच लिखते हैं तो वो और प्रभावी हो जाता है। ऐसी ही कुछ बात ‘सरगोशियों के स्वर’ में है। आज की इस साहित्यिक चर्चा में कुमाऊं विश्वविद्यालय के हिंदी के आचार्य डॉ देव सिंह पोखरिया जी को सुनने के अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कवि को अपने लिए और दूसरों के लिए निर्मम होना होगा। तभी सच लिख सकेगा। कविता और साहित्य का समाज को बदलने में क्या योगदान है इस पर भी उन्होंने बात की। सोबन सिंह जीना विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट जी ने कविता संग्रह की बहुत सारी कविताओं को हमारे सामने रखा और उनके भाव पर बातचीत की। बदलते हुए समय में ये कवितायें कैसे महत्वपूर्ण हैं इस पर भी बिष्ट सर ने दृष्टि डाली। इसके बाद मशहूर रंगकर्मी और कवि नवीन बिष्ट जी ने सुशील सर के रचना संसार पर बात की। उनके ब्लॉग उलूक टाइम्स की चर्चा की। सोबन सिंह जीना विश्विद्यालय में सांख्यिकी के प्राध्यापक प्रोफेसर नीज तिवारी जी ने इन कविताओं के समसामयिकता पर बात की और बताया कि ये रचनायें कैसी आज प्रासंगिक हैं। इसी क्रम में प्रधानाचार्य इंटर कॉलेज स्यालीधार श्री उमेश पाण्डे जी ने वर्तमान समय में शिक्षक और विद्यार्थियों के सम्बन्धों और सुशील जोशी सर की जीवन शैली और सिद्धांतों पर बात की। साथ उनके पिता के जीवन चरित्र पर भी प्रकाश डाला। फोटोग्राफर और अध्येता श्री जय मित्र बिष्ट जी ने सुशील सर के बहु आयामी व्यक्तित्व और डॉ शमशेर सिंह बिष्ट जी के साथ उनके सम्बन्धों को याद किया। साथ ही अपनी फोटो ग्राफी की पुस्तक भी उन्हें भेंट की। सोबन सिंह जीना विश्विद्यालय में जनसंचार एवं पत्रकारिता के प्राध्यापक डॉ ललित जोशी ने आज की बातचीत को अंतरानुशासनिक बताते हुए ये उम्मीद जताई कि ऐसी चर्चाएं भविष्य में होती रहेंगे। सोबन सिंह जीना विश्विद्यालय प्राणिविज्ञान के प्राध्यापक डॉ अरुण ने अपनी बातचीत में कविता संग्रह को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ा और संग्रह की प्रशंसा की। सोबन सिंह जीना विश्विद्यालय के छात्र और एक अच्छे पाठक गौरव कांडपाल ने कविता संग्रह से कुछ कवितायें बहुत उतार-चढाओं के साथ पढ़ी और उनको समकालीन स्थितियों से जोड़ा। युवा साईक्लिस्ट दिनेश दानु ने युवाओं के जीवन में खेलों और फिट रहने और अपनी संस्कृति, धरोहर के संरक्षण पर चर्चा की। अंत में 'फारेस्ट विस्प' के संचालक और सुशील सर के पुत्र अभिषेक ने अपने पिता के कविताओं पर बात की और सबका धन्यवाद दिया।
आज की ये चर्चा बिलकुल अनौपचारिक थी जिसमें सबको खुलकर बोलने का अवसर मिला। साहित्य की यही विशेषता है कि वह वाचाल को मृदुभाषी और कम बोलने वाले को विचार व्यक्त करना सिखा देता है। सुशील सर के कारण आज ये सम्भव हो सका। चर्चा में सोबन सिंह जीना विश्विद्यालय में भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो ज्योति जोशी, साहित्यकार शम्भु राणा जी, डी आर डी ओ के वैज्ञानिक श्री हेमंत पांडे, पत्रकार जगदीश जोशी जी तथा डॉ पूरन जोशी भी शामिल रहे।
रिपोर्ताज --- डा0 पूरन जोशी
प्रधानमंत्री जी के पूर्व सलाहकार आई ए एस श्री भास्कर खुल्बे जी
वीडियो साभार श्री सागर रौतेला

























बहुत सुन्दर और सराहनीय 🙏
जवाब देंहटाएंबेहद ज़रूरी किताब. मध्य हिमालय की खूबसूरत वादियों में ढलती साँझ के साये में जब इस पुस्तक की कवितायें हम सबने पढ़ी और उनपर संवाद किया, यह अनुभव सुख देने वाला था. रचना के संसार में यह सक्रियता बनी रहे सर!
जवाब देंहटाएंकितना सकारात्मक लग रही है विमोचन की सुंदर तस्वीरें और डॉ. साहब के द्वारा किया गया अत्यंत सुंदर विश्लेषणात्मक भावपूर्ण है।
जवाब देंहटाएंचिट्ठाजगत की सबसे सक्रिय चिट्ठे को सार्थक , संदेशात्मक पुस्तक के लिए मेरी हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाऍं , पुस्तक सचमुच बहुत अच्छी बनी है।
प्रणाम सर
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ११ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।