कितना भी लिखें कुछ भी लिखें
कल परसों भी यही सब तो होना है
नये होने की आस बस जिंदा रखनी है
पुराना हुआ रहेगा भी
उस की खबर को अब कब्र में ही तो किसी सोना है
वो करेगा कुछ नहीं
करे कराये पर कुछ ना कुछ उल्टा सीधा ही तो उसे कहना है
देखने के लिये
तैयार तो किये जा रहे हैं मैदाने जंग शहर शहर
वहां जंग छोड़ कर
और कुछ अजीब सा ही तो होना है
आदत डालनी ही पड़ेगी
डर के साथ जीने की
पढ़ाना तो किसी पुराने वीर की कहानी ही है
अभी के समय का तो बस रोना है
समझ में तब आये किसी के
जब कोई समझना चाहे
खुद ही मौज में दिखते है सारे जवान आज
कंधे अपने दे कर किसी कोढ़ी को तारने की बन के सीढ़ी
चढ़ कर ऊपर
मारनी है लात सबसे पहले सीढ़ी को गिराने के लिये उसने भी
एक बार नहीं
बेवकूफों के साथ हर बार तो यही होना है
दिखता है सामने से
होता हुआ भ्रष्टाचार बड़े पैमाने का
सुनना कौन चाहता है
मुखौटा ओढ़ा हुआ देशभक्त देशप्रेमी के करे धरे का
किसी के पास कहाँ समय है
कहाँ किसे इस सब के लिये सोचना है
रोने के लिये रखा है सामने से कोरोना है
‘उलूक’
तेरी बुद्धि तेरा सोचना तेरा नजरिया
बदलना तो नहीं है
तेरे लिये कूड़े पर तेरा लिखना
हमेशा
कूड़ा कूड़ा जैसा ही तो होना है।
चित्र साभार: http://www.clker.com/
डर के साथ जीने की
पढ़ाना तो किसी पुराने वीर की कहानी ही है
अभी के समय का तो बस रोना है
समझ में तब आये किसी के
जब कोई समझना चाहे
खुद ही मौज में दिखते है सारे जवान आज
कंधे अपने दे कर किसी कोढ़ी को तारने की बन के सीढ़ी
चढ़ कर ऊपर
मारनी है लात सबसे पहले सीढ़ी को गिराने के लिये उसने भी
एक बार नहीं
बेवकूफों के साथ हर बार तो यही होना है
दिखता है सामने से
होता हुआ भ्रष्टाचार बड़े पैमाने का
सुनना कौन चाहता है
मुखौटा ओढ़ा हुआ देशभक्त देशप्रेमी के करे धरे का
किसी के पास कहाँ समय है
कहाँ किसे इस सब के लिये सोचना है
रोने के लिये रखा है सामने से कोरोना है
‘उलूक’
तेरी बुद्धि तेरा सोचना तेरा नजरिया
बदलना तो नहीं है
तेरे लिये कूड़े पर तेरा लिखना
हमेशा
कूड़ा कूड़ा जैसा ही तो होना है।
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तेरी बुद्धि
जवाब देंहटाएंतेरा सोचना
तेरा नजरिया
बदलना तो नहीं है
सादर नमन..
समझ में तब आये किसी के
जवाब देंहटाएंजब कोई समझना चाहे
खुद ही मौज में दिखते है सारे जवान आज
कंधे अपने दे कर किसी कोढ़ी को तारने की बन के सीढ़ी
चढ़ कर ऊपर
लाजवाब रचना जोशी सर
दिखता है सामने से
जवाब देंहटाएंहोता हुआ भ्रष्टाचार बड़े पैमाने का
सुनना कौन चाहता है
मुखौटा ओढ़ा हुआ देशभक्त देशप्रेमी के करे धरे का
बहुत सटीक, सार्थक...
लाजवाब सृजन।
कमाल की सच बयानी है
जवाब देंहटाएंबेहतरीन सृजन
"वो करेगा कुछ नहीं
जवाब देंहटाएंकरे कराये पर कुछ ना कुछ उल्टा सीधा ही तो उसे कहना है"
वाह! बेहतरीन व्यंग्य लिखा है आपने। बिल्कुल सीधी भाषा में बतायी गयी बातें।
और ये भी सत्य है-
"दिखता है सामने से
होता हुआ भ्रष्टाचार बड़े पैमाने का
सुनना कौन चाहता है
मुखौटा ओढ़ा हुआ देशभक्त देशप्रेमी के करे धरे का"
आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 13 सितंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंकल हिन्दी दिवस है
जवाब देंहटाएंख्याल रखिएगा
सब कुछ हिन्दी में ही होना चाहिए
खाना-पीना
रोना-गाना
दुलारना-लतियाना
सब हिन्दी ही मे हो
सादर नमन
हाहा बढ़िया व्यंग्य सर
जवाब देंहटाएंआदत डालनी ही पड़ेगी
जवाब देंहटाएंडर के साथ जीने की
पढ़ाना तो किसी पुराने वीर की कहानी ही है
अभी के समय का तो बस रोना है. हिंदी दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं. नमन सह।
नमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार (14 सितंबर 2020) को '14 सितंबर यानी हिंदी-दिवस' (चर्चा अंक 3824) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
--
-रवीन्द्र सिंह यादव
समझ में तब आये किसी के
जवाब देंहटाएंजब कोई समझना चाहे
खुद ही मौज में दिखते है सारे जवान आज
कंधे अपने दे कर किसी कोढ़ी को तारने की बन के सीढ़ी
चढ़ कर ऊपर
मारनी है लात सबसे पहले सीढ़ी को गिराने के लिये उसने भी
एक बार नहीं
बेवकूफों के साथ हर बार तो यही होना है
बढिया व्यंग्य सर .....
समझ में तब आये किसी के
जवाब देंहटाएंजब कोई समझना चाहे
खुद ही मौज में दिखते है सारे जवान आज
कंधे अपने दे कर किसी कोढ़ी को तारने की बन के सीढ़ी
चढ़ कर ऊपर
मारनी है लात सबसे पहले सीढ़ी को गिराने के लिये उसने भी
एक बार नहीं
बेवकूफों के साथ हर बार तो यही होना है ,,,,,,।,।।बहुत सही बात है लिखी है आपने, बहुत ख़ूब,
शब्द-शब्द तीखे कटाक्ष से भरा... यथार्थ को बड़ी बारीकी से उकेरा है आपने... साधुवाद 🙏🌺🙏
जवाब देंहटाएंहिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं
कृपया मेरी इस लिंक पर पधार कर मुझे अनुगृहीत करें...
जवाब देंहटाएंhttp://ghazalyatra.blogspot.com/2020/09/2020.html?m=1
बहुत सुन्दर।
जवाब देंहटाएंहिन्दी दिवस की अशेष शुभकामनाएँ।
सबका अपना-अपना नजरिया है समझने का जो कोशिश करें समझने के वह समझे जो नहीं उसके लिए सब कूड़ा करकट ही समझो
जवाब देंहटाएंबहुत खूब!
आदत डालनी ही पड़ेगी
जवाब देंहटाएंडर के साथ जीने की
पढ़ाना तो किसी पुराने वीर की कहानी ही है
अभी के समय का तो बस रोना है
बहुत सुंदर और सटीक सृजन आदरणीय।
बहुत बढ़िया सर!
जवाब देंहटाएंकरोना इस इस रोने में सब कुछ करोना मतलब कूड़ा होना है ...
जवाब देंहटाएंहर लिखा एक ण एक दिन कूड़ा होना है ...
बहुत सुन्दर और सटीक लेखन सर . हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई .
जवाब देंहटाएंBAHUT BADHIYA
जवाब देंहटाएंबहुत खूब
जवाब देंहटाएंI did a search about the field and identified that very likely the majority will agree with your web page.
जवाब देंहटाएंशब्द-बाण भेदती हुई .. बहुत बढिया ।
जवाब देंहटाएंवाह ! बेहतरीन सर ..
जवाब देंहटाएंसादर
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