उलूक टाइम्स: जब कुछ हो ही नहीं रहा है तो काहे कुछ लिखना कुछ नहीं लिखो खुश रहो

चिट्ठा अनुसरणकर्ता

शनिवार, 23 नवंबर 2019

जब कुछ हो ही नहीं रहा है तो काहे कुछ लिखना कुछ नहीं लिखो खुश रहो



छोड़ो
रहने दो
कुछ नहीं
लिखो

कुछ नहीं
ही
सब कुछ है

कुछ कुछ 
लिखते लिखते

अब तो
समझ लो
कुछ नहीं
लिखोगे

पहरे
से
दूर रहोगे

लिखे
का
हिसाब भी
नहीं
देना पड़ेगा

कहीं
कोई
बही खाता
ही नहीं बनेगा

आई टी सेल
नजर
ही
नहीं रखेगा

सब कुछ
सामान्य
सा दिखेगा

कुछ नहीं
लिखना

एक
नेमत होती है

समझा करो

सबका
मालिक
एक है

सब जगह
अलग अलग है
माना
फिर भी
नेक है

मालिक
की जय
होनी ही चाहिये
करते चलो

कुछ नहीं
लिखना है
का
सिद्धांत
बना कर
लिखने के
क्षेत्र में
जहाँ तक
पहुँचने की चाहत है
आगे बढ़ो

किसने
रोका है
बेधड़क लिखो

बस
कुछ नहीं
लिखने पर
अड़े रहो खड़े रहो

आँखें
कान नाक
बंद रख सको
तो
सोने में सुहागा होगा

सब कुछ
बंद रखने वालो
के लिये
हर रास्ते पर
माला लिये खड़ा
मालिक का भेजा
कोई ना कोई
अभागा होगा
समझा करो

ध्यान मत दो
जो हो रहा है
किसी के
भले के लिये ही
हो रहा होगा

गीता
सिरहाने पर रख कर
सोया करो

हर ऐरे गैरे
की
रामायण पर
ध्यान मत दिया करो

कुछ नहीं
कहने पर
टिके रहो

कहे कहाये पर
सुने सुनाये पर

कान
मत दिया करो
कुछ नहीं करने वाले
हर जगह होते हैं
सारे ब्रह्माण्ड का भार
वो सब ही ढोते हैं 

कुछ नहीं करने वालों के
चरण स्पर्श करो

विनती करो

कहो

कुछ नहीं कहता हूँ
कुछ नहीं करता हूँ 
कुछ नहीं लिखता हूँ

कुछ नहीं कमेटी में 
कहीं तो कोई स्थान
अब तो दो

सारे शरीफ
कुछ
करने कहने लिखने
वाले  जानते हैं

उलूकबेशर्म है
कुछ नहीं कहता है
उसे जरा सा भी शर्म नहीं है

जरूरत
किस बात की
कहाँ पर है

भगवन
ध्यान मत दो
कुछ नहीं करो
कुछ नहीं लिखो

कुछ नहीं को
मिलता है सम्मान
कुछ तो महसूस करो

कुछ नहीं शहर के
सम्मानित
रोज सुबह के अखबार में
कुछ नहीं
समाचारों के साथ
देखा करो

कुछ नहीं को
आत्मसात करो

देश के साथ
कुछ नहीं गाते
आगे बढ़ो

कुछ नहीं
लिखो

कुछ नहीं पर
टिप्पणी करो

कुछ नहीं
की
गिनती करो

ठान लो
इसके लिखे को
कहीं नहीं
दिखना चाहिये
डटे रहो अड़े रहो

कुछ मत करो
लिखने वाले
को
अहसास कराओ

कुछ नहीं
हो
लिखते रहो

कुछ नहीं
लिखना
अच्छा है
कुछ लिखने से

कुछ 
नहीं
लिखो।

 
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14 टिप्‍पणियां:

  1. बासी ख़बरें, बास मारते काम, इंसानियत का रोज़ाना ही काम-तमाम !
    तू क्या पढ़ेगा और क्या लिखेगा?
    पढ़ने-लिखने से तो बेहतर है कि तू कुर्सीधारी के चरण दबा, उसका भरोसा जीत फिर उसके गले तक पहुँच कर, उसे भी दबाकर उसकी कुर्सी हथिया ले.

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 24 नवम्बर 2019 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (25-11-2019) को "कंस हो गये कृष्ण आज" (चर्चा अंक 3530) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं….
    *****
    रवीन्द्र सिंह यादव

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  4. कुछ नहीं लिख कर भी लिकने की कला के माहिर हैं आप ...
    इतना आसन नहीं होताकुच और कह कर जो कहना है वो कह देना ...
    लाजवाब ...

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  5. वाह!सर ...कुछ न लिख कर भी बहुत कूछ लिख देते हैं आप ।

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  6. कुछ नहीं में ही तो सब कुछ छिपा है, अपने तो सार सार ग्रहण कर लिया, बहुत खूब !

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  7. 'कुछ नहीं'-पर लिखना एक बहाना कितना कुछ समेटने का .लिखनेवाला सीध-सीधे नाक कहाँ पकड़ता है ,हमेशा घुमा कर.

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