उलूक टाइम्स: शुभ हो दीप पर्व उमंगों के सपने बने रहें भ्रम में ही सही

चिट्ठा अनुसरणकर्ता

रविवार, 15 नवंबर 2020

शुभ हो दीप पर्व उमंगों के सपने बने रहें भ्रम में ही सही

 


हर्षोल्लास
चकाचौँध रोशनी
पठाकों के शोर
और बहुत सारे
आभासी सत्यों की भीड़

 बीच से
गुजरते हुऐ
कोशिश करना
पंक्तियों से नजरें चुराते हुऐ
लग जाना
बीच के निर्वात को
परिभाषित करने में

कई सारे भ्रमों से झूझते हुऐ
 व्यँग खोजना
उलझन भरी सोच में

और लिख देना कुछ नहीं

इस कुछ नहीं लिखने
और कहीं
अन्दर के किसी कोने में बैठे
थोड़े से अंधेरे को
चकाचौँध से घेर कर
कत्ल कर देने की
सोच की रस्सियाँ बुनना

इंगित करता हुआ
महसूस कराता लगता है
समुद्र मंथन इसी तरह हुआ होगा 
 निकल कर आई होंगी
लक्ष्मी भी शायद

आँखें बंद कर लेने के बाद
दिख रहे प्रकाश को
दीपावली कहा गया होगा

लिख देना
और फिर लिखे के अर्थ को
खुद ही खुद में खोजना
बहुत आसान नहीं

फिर भी
इशारों इशारों में
हर किसी का लिखा
इतना तो बता देता है
लिखा हुआ
सीधे सीधे
सब कुछ बता जायेगा
सोचना ठीक नहीं

अंधेरा है तो प्रकाश है
फिर किसलिये
छोटे से अँधेरे को घेर कर
लाखों दियों से मुठभेड़

यही दीपावली है
यही पर्व है दीपों का

कुछ देर के लिये
अंधेरे से मुँह मोड़ कर बैठ लेने
और खुश हो लेना
कौन सा बुरा है ‘उलूक’

कुछ समझना
कुछ समझाना
बाकी सब
बेमतलब का गाना

फिर भी
बनी रहे लय
कुछ नहीं
और कुछ के
बीच की
जद्दोजहद के साथ

शुभ हो दीप पर्व
उमंगों के सपने बने रहें
भ्रम में ही सही।


चित्र साभार:
https://medium.com/the-mission/a-practical-hack-to-combat-negative-thoughts-in-2-minutes-or-less-cc3d1bddb3af

19 टिप्‍पणियां:

  1. आँखें बंद कर लेने के बाद
    दिख रहे प्रकाश को
    दीपावली कहा गया होगा - वाह!

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  2. कुछ समझना कुछ समझाना
    बाक़ी सब बेमतलब का गाना...बिल्कुल सटीक वर्णन..।

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  3. उमंगों के सपने बने रहें...
    बहुत ज़रूरी है इनका बना रहना .

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  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज सोमवार (१६-११-२०२०) को 'शुभ हो दीप पर्व उमंगों के सपने बने रहें भ्रम में ही सही'(चर्चा अंक- ३८८७) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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  5. कोशिश करना
    पंक्तियों से नजरें चुराते हुऐ
    लग जाना
    बीच के निर्वात को
    परिभाषित करने में..
    अति सुन्दर !

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  6. सटीक..सार्थक रचना...

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

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  7. बहुत बहुत सुन्दर | बार बार पढने वाली रचना |

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  8. बहुत सुंदर रचना। दीपावली और भाई दूज की शुभकामनाएं।

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  9. आँखें बंद कर लेने के बाद
    दिख रहे प्रकाश को
    दीपावली कहा गया होगा - - हमेशा अलग अंदाज़ में उभरती रचना अपना प्रभाव छोड़ जाती है - - दीपावली की असंख्य शुभकामनाएं - - नमन सह।

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  10. आँखें बंद कर लेने के बाद
    दिख रहे प्रकाश को
    दीपावली कहा गया होगा.....बहुत सही, सुन्दर अभिव्यक्ति !!

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  11. अंधेरा है तो प्रकाश है
    फिर किसलिये
    छोटे से अँधेरे को घेर कर
    लाखों दियों से मुठभेड़
    वाह!!

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  12. कितना सही कहा आपने, उजाले का भ्रम ही तो है. एक दिन के प्रकाश से जीवन का अँधेरा कहाँ मिटता है. शुभ हो!

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  13. अंधेरा है तो प्रकाश है
    फिर किसलिये
    छोटे से अँधेरे को घेर कर
    लाखों दियों से मुठभेड़
    बहुत सटीक सुन्दर एवं सार्थक....
    लाजवाब सृजन।

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