उलूक टाइम्स: फिर हुई खुजली अंगुलियों में मगर कलम की स्याही आजकल जाम है

बुधवार, 15 जुलाई 2026

फिर हुई खुजली अंगुलियों में मगर कलम की स्याही आजकल जाम है

 

वर्णांधता या रंग अंधापन
परिभाषित करना
आज जब बहुत ही आसान है
समझ में आए रंग भी
और दिखे इंद्रधनुष रक्त में
साधू फिर क्यों परेशान है

सौ झूठ बोलते
दिव्य दर्शन सच के हो जाना
सुना आज बहुत आम है
कहीं कितने भी हों विलाप भक्तो
मूल्यों का आलाप जरूरी सुबहो शाम है

सही की परिभाषा गढ़ रहा है नई कोई
समझा करो बहुत ही विद्वान है
गिरोह से प्रेम रखता है तो क्या
गिरोह के कत्लेआम में ही तो सम्मान है

बतला रहा है
टांग पर खड़ा है एक बरसों से
क्या हुआ अगर हम्माम है
कपड़े खुद के उतरे हुए हैं सारे सभी
आईने में तो दिख रहा सब गुलफाम है

किसलिए करें बात शर्म करने की
लाशों के ढेर हैं ठहाके भी हैं
बस रोना हराम है
लिखे में दिख रहा है चेहरा किसी का
और लिखा माथे पर भी गुलाम है

‘उलूक’ गिनना मोतियाबिंद सोच पर पड़े
और बिखरे हुए कागजों पर
एक बड़ा काम है
किसको देखनी है अब रोशनी सुबह की भगत
अंधेरे का ही बस करना जब गुणगान है?

चित्र साभार: https://pixabay.com/

5 टिप्‍पणियां:

  1. मगर कलम की स्याही आजकल जाम है
    सारा वक्त सोचने में चला जाता है
    आभार
    वंदन

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  2.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शुक्रवार 17 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. अंधेरे का ही गुणगान है
    यही हो रहा और यही सच है
    और फिर कडवा सच:-
    लाशों की ढेर पर ठहाके

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  4. किसलिए करें बात शर्म करने की
    लाशों के ढेर हैं ठहाके भी हैं
    बस रोना हराम है
    लिखे में दिख रहा है चेहरा किसी का
    और लिखा माथे पर भी गुलाम है


    बेहतरीन रचना 🙏 सादर प्रणाम गुरुजी

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  5. गहरा कटाक्ष, वाक़ई यह समय बहुत अजीब सा है, क्या असली है क्या नक़ली फ़र्क़ करना कठिन हो गया है, अंधेरा ही अंधेरा जब सामने हो तो लोग रोशनी को भूल ही जाते हैं, हरेक सजग व्यक्ति को अपना दीपक ख़ुद ही जलाना होगा

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