उलूक टाइम्स: और खड़ा हो लेता है प्रतियोगिता में विद्वानों के साथ

बुधवार, 10 मार्च 2021

और खड़ा हो लेता है प्रतियोगिता में विद्वानों के साथ

 

किसलिये समझा रहे हो

मुझे 
पता है मुझे भी मरना ही है

लेकिन मैं आपके कहने पर
मौत को गले नहीं लगा सकता हूं

मैं मरूँगा 
तो गुरु जी के कहने पर ही 
मरूँगा

गुरु जी
मरने के रास्ते समझाने के लिये प्रसिद्ध हैं

फिर किसलिये
आप जैसे नये नवेले से सीखना मरना
 
मुझे भी तो
वैसे भी मरना ही है कभी ना कभी 

और मुझे ये भी पता है
कि मैं एक मेमना हूँ
और वो एक भेड़िया है

तुम्हें क्या परेशानी है
एक मेमने के 
भेड़िये के साथ प्रेमालाप करने से

जमाना बदल रहा है और भेड़िया भी
जमाने के हिसाब से

भेड़िया
अब कार में नहीं दिखता 
है कभी
उसकी कार घर में खड़ी रहती है

भेड़िया
अब पैदल चलता है देखते क्यों नहीं हो 

तुम्हें भी
जमाने के हिसाब से
बदलना जरूरी है

मेमने के बारे में किसलिये सोचते हो
भेड़िये को देखो ध्यान मत भटकाओ

लिखना लिखाना ठीक है
लिखा हुआ अगर कविता हो गया
तो उस से ब‌ड़ा शाप नहीं हो सकता है

बकवास करने के कुछ नुकसान
कविता हो जाना भी है
दीवार में खींची हुई  कुछ लकीरों के

और इसी तरह के
कुछ लिखे लिखाये से प्रश्न उठना शुरु होते हैं

कोई कुछ भी लिख देता है
और खड़ा हो लेता है
प्रतियोगिता में विद्वानों के साथ।

चित्र साभार: https://www.123rf.com/

29 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 12-03-2021) को
    "किसी का सत्य था, मैंने संदर्भ में जोड़ दिया" (चर्चा अंक- 4003)
    पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १२ मार्च २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।


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  3. तुम्हैं भी
    जमाने के हिसाब से
    बदलना जरूरी है
    मेमने के बारे में किसलिये सोचते हो
    भेड़िये को देखो
    ध्यान मत भटकाओ

    उम्दा रचना.

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर व्यंग्य रचना।
    --
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  5. भेड़िया
    अब कार में नहीं दिखता कभी
    उसकी कार घर में खड़ी रहती है
    भेड़िया अब पैदल चलता है
    देखते क्यों नहीं

    तुम्हैं भी
    जमाने के हिसाब से
    बदलना जरूरी है
    मेमने के बारे में किसलिये सोचते हो
    भेड़िये को देखो
    ध्यान मत भटकाओ...वाह!गज़ब।
    सादर

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  6. वयंगात्मक शैली में लाजवाब अभिव्यक्ति..

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  7. बकवास करने के
    कुछ नुकसान
    कविता हो जाना भी है
    - तो कोई बकवास करने का अधिकार क्यों छोड़े -कविता तो घाते में मिली चीज़ है.

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  8. और इसी तरह के
    कुछ लिखे लिखाये से
    प्रश्न उठना शुरु होते हैं
    कोई कुछ भी लिख देता है
    और खड़ा हो लेता है
    प्रतियोगिता में विद्वानों के साथ।
    यथारीति तेज़ धार लेखन - - साधुवाद सह।

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  9. व्यंगात्मक शैली।अपने चिरपचित अंदाज़ में बहुत ही सुंदर सृजन,सादर नमन आपको

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  10. सुंदर सृजन।
    गजब तंज ।
    सटीक सार्थक।

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  11. लिखना लिखाना ठीक है
    लिखा हुआ
    अगर कविता हो गया
    तो उस से ब‌ड़ा शाप नहीं हो सकता है... वाह! बहुत खूब!!!

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  12. वाह! वाह! लाजवाब आदरणीय सर।
    सटीक पंक्तियाँ। व्यंगपूर्ण उम्दा सृजन।
    सादर प्रणाम आदरणीय सर 🙏

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  13. आपका ब्लॉग मुझे यहा मिला Top Hindi Blogs बहुत अच्छा लिखते है आप

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  14. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

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  15. मेमने के बारे में किसलिये सोचते हो
    भेड़िये को देखो ध्यान मत भटकाओ

    लिखना लिखाना ठीक है
    लिखा हुआ अगर कविता हो गया
    तो उस से ब‌ड़ा शाप नहीं हो सकता है आप की लेखनी और सच को व्यंग में लिखना,अदभुत है ।आदरणीय शुभकामनाएँ,

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  16. आज भी आपके तेवर वही हैं और अंदाज़ में आज भी वही तंज़ है! बहुत ख़ूब... अच्छा चित्र खींचा है वर्त्तमान युग क!!

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  17. मेमना हो जाना या फिर भेड़िया हो जाना ... खुद के अन्दर ही है ये सब हो जाना ...
    गहरा तंज़ है रचना में ...

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  18. बहुत गहरे तक उतरता तीखा कटाक्ष
    वाह
    सादर

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