उलूक टाइम्स: कुछ अलग से हो निर्भया के साथ हुए को भी समझाओगे

सोमवार, 27 जुलाई 2026

कुछ अलग से हो निर्भया के साथ हुए को भी समझाओगे

 


अब कौन सा छछूंदर और ढूंढ के तुम ले आओगे
कितना गिरोगे हजूरे आला तुम अब लुढ़क जाओगे

रहने दो नापना एक फुट को तीस सेंटीमीटर से अब
अपनी उलझनों को जनता को खुद आ दिखाओगे

अपना चेहरा खुद तो देख लिया करो किसी का नोचने से पहले
हमाम की दीवार ढह गई है अब कहो किसका क्या छुपाओगे

लिखे में दिखता है लिखने वाले का सबकुछ बहुत साफ साफ
अपने लिखे में खुद को लिखा हुआ कभी तो कुछ दिखाओगे

बेटियां किस की थी किसने सोचना था तुम क्यों पछताओगे
कुछ अलग से  हो निर्भया के साथ हुए को भी समझाओगे

‘उलूक’ चिकने घड़े से भी पूछेगा मजबूरी में हमेशा आदतन
जतन कर लो फिसल गए किसी और के हाथों से टूट जाओगे |

चित्र साभार https://www.shutterstock.com/

5 टिप्‍पणियां:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 30 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  2. बेटियां किस की थी किसने सोचना था तुम क्यों पछताओगे
    कुछ अलग से हो निर्भया के साथ हुए को भी समझाओगे

    —रोंगटे खड़े हो जाते हैं -
    फिर भी कहाँ कुछ बदला
    और ना कुछ बदल पाएगा

    -उम्दा लेखन

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  3. हमाम की दीवार ढह गई है अब कहो किसका क्या छुपाओगे
    शानदार

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  4. वाह!
    आईना दिखाया भी तो ऐसे कि सदियों तक शक्ल दिखती रहे भक्त की...
    सादर प्रणाम सर.

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  5. लिखे में दिखता है लिखने वाले का सबकुछ बहुत साफ साफ
    अपने लिखे में खुद को लिखा हुआ कभी तो कुछ दिखाओगे


    बेहतरीन रचना

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