अब कौन सा छछूंदर और ढूंढ के तुम ले आओगे
कितना गिरोगे हजूरे आला तुम अब लुढ़क जाओगे
रहने दो नापना एक फुट को तीस सेंटीमीटर से अब
अपनी उलझनों को जनता को खुद आ दिखाओगे
अपना चेहरा खुद तो देख लिया करो किसी का नोचने से पहले
हमाम की दीवार ढह गई है अब कहो किसका क्या छुपाओगे
लिखे में दिखता है लिखने वाले का सबकुछ बहुत साफ साफ
अपने लिखे में खुद को लिखा हुआ कभी तो कुछ दिखाओगे
बेटियां किस की थी किसने सोचना था तुम क्यों पछताओगे
कुछ अलग सा हो निर्भया के साथ हुए को भी समझाओगे
‘उलूक’ चिकने घड़े से भी पूछेगा मजबूरी में हमेशा आदतन
जतन कर लो फिसल गए किसी और के हाथों से टूट जाओगे |
चित्र साभार https://www.shutterstock.com/
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