अब कौन सा छछूंदर और ढूंढ के तुम ले आओगे
कितना गिरोगे हजूरे आला तुम अब लुढ़क जाओगे
रहने दो नापना एक फुट को तीस सेंटीमीटर से अब
अपनी उलझनों को जनता को खुद आ दिखाओगे
अपना चेहरा खुद तो देख लिया करो किसी का नोचने से पहले
हमाम की दीवार ढह गई है अब कहो किसका क्या छुपाओगे
लिखे में दिखता है लिखने वाले का सबकुछ बहुत साफ साफ
अपने लिखे में खुद को लिखा हुआ कभी तो कुछ दिखाओगे
बेटियां किस की थी किसने सोचना था तुम क्यों पछताओगे
कुछ अलग से हो निर्भया के साथ हुए को भी समझाओगे
‘उलूक’ चिकने घड़े से भी पूछेगा मजबूरी में हमेशा आदतन
जतन कर लो फिसल गए किसी और के हाथों से टूट जाओगे |
चित्र साभार https://www.shutterstock.com/
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 30 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबेटियां किस की थी किसने सोचना था तुम क्यों पछताओगे
जवाब देंहटाएंकुछ अलग से हो निर्भया के साथ हुए को भी समझाओगे
—रोंगटे खड़े हो जाते हैं -
फिर भी कहाँ कुछ बदला
और ना कुछ बदल पाएगा
-उम्दा लेखन
हमाम की दीवार ढह गई है अब कहो किसका क्या छुपाओगे
जवाब देंहटाएंशानदार
वाह!
जवाब देंहटाएंआईना दिखाया भी तो ऐसे कि सदियों तक शक्ल दिखती रहे भक्त की...
सादर प्रणाम सर.
लिखे में दिखता है लिखने वाले का सबकुछ बहुत साफ साफ
जवाब देंहटाएंअपने लिखे में खुद को लिखा हुआ कभी तो कुछ दिखाओगे
बेहतरीन रचना