उलूक टाइम्स: बेलगाम
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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

किसलिए रट लगाए है बैठा है ये भी लिख दो और वो भी लिख दो

 


कुछ आसमान पर लिख दो
कुछ सड़क पर पड़े बेकार के सामान पर लिख दो
कुछ घर पर आए मेहमान पर लिख दो
कुछ खुदा पर कुछ भगवान पर लिख दो
कहीं भी कुछ नहीं हिलेगा
आने वाले बहुत बड़े तूफान पर कुछ लिख दो

पूंछ मोटी होना शुरू हो गई बाल खड़े हो जाएंगे
साहिब के साहिबान पर लिख दो
शर्म नहीं आएगी जरा भी
बलात्कार की खबर सुबह से लेकर शाम लिख दो
किसी हजूर को बना भी दिया जाएगा हजूरे आला
क्या उखाड़ लोगे आला कमान लिख दो

दिखता नहीं है न सुनाई देता है
सब फजूल है फर्जी है
अपने हिसाब का नहीं है फरमान लिख दो
पती पत्नी की लड़ाई है क्या हुआ अगर सरकार में है
करोड़ों का हिसाब है जनता के नाम लिख दो

हम भी सुलझा लेंगे हमारे लिए लिखने वाले भी
अपने अपने चिट्ठे में छपा लेंगे डरो मत बेलगाम लिख दो 
शर्म करें सवाल पूछने वाले
उनके लिए हैं हमारे पास बने बनाए जवाब
कत्लेआम बबाल लिख दो

‘उलूक’ कहते हैं तेरे ही दोस्त तुझसे 
तुझे अक्ल नहीं है
किसलिए बोलता है बेलगाम 
हजूरों के खिलाफ
कुछ सोचता भी नहीं है
कुछ नहीं करने वाले कहीं भी 
कुछ कर देने का सब कुछ
तेरे नाम लिख देंगे
किसलिए रट लगाए है बैठा है
ये भी लिख दो और वो भी लिख दो

चित्र साभार: https://medium.com/


सोमवार, 7 अक्टूबर 2019

कुछ सजीव लिखें कुछ अजीब लिखें कुछ लगाम लिखें कुछ बेलगाम लिखें

कुछ
उठती उनींदी
सुबह लिखें

कुछ
खोती सोती
शाम लिखें

कुछ
जागी रातों
के नाम लिखें

कुछ
बागी सपनों
के पैगाम लिखें

कुछ
बहकी साकी
के राम लिखें

कुछ
आधे खाली

कुछ
छलके जाम लिखें

कुछ
लिखने
ना लिखने
की बातों में से

थोड़ा
सा कुछ
खुल कर
सरेआम लिखें

कुछ
दर्द लिखें
कुछ खुशी लिखें

कुछ
सुलझे प्रश्नों
के उलझे
इम्तिहान लिखें

कुछ
झूठ लिखें
कुछ टूट लिखें

कुछ
रस्ते कुछ
कुछ सच के
कुछ अन्जान लिखें

कुछ
बनते बनते से
कुछ शैतान लिखें

थोड़े से

कुछ
मिट्ठी से उगते
इन्सान लिखें

कुछ
कुछ लिखते
लिखते कुछ
खुद की बातें

‘उलूक’

कुछ
बातें उसकी
कुछ उससे
पहचान लिखें।

चित्र साभार: https://pngio.com